<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451</id><updated>2012-02-16T16:18:10.086-08:00</updated><title type='text'>alag vichar</title><subtitle type='html'>www.alag vichar.com</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>25</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-5971875203365659875</id><published>2011-05-09T08:53:00.001-07:00</published><updated>2011-05-09T08:53:56.292-07:00</updated><title type='text'>२०१२ में भाजपा की सत्ता में वापसी तय-निशंक</title><content type='html'>&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;२०१२&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; में भाजपा की सत्ता में वापसी तय-निशंक&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देश के हिमालयी बेल्ट में सबसे तेजी से विकसित होने &lt;span&gt;और&lt;/span&gt;   छोटे राज्य के बावजूद कई मामलों में देश का नंबर वन राज्य बन चुके ,लेकिन   2012 में चुनावी महाभारत झेलने को तैयार,उत्तराखंड को 2020 तक देश का  मॉडल  स्टेट बनाने का संकल्प जताने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमेश  पोखरियाल  निशंक ने  इन्ही सब मुद्दांे पर  हिन्दुस्थान समाचार के  उत्तराखंड ब्यूरो  प्रमुख धीरेन्द्र प्रताप सिंह से  बातचीत की।  जिसके  संक्षिप्त अंश यहां  पेश हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न-1ः सरकार के चार साल पूरे हो गए है अब उसे फिर से चुनाव मैदान में जाना है उसकी क्या तैयारियां हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; उत्तर- भाजपा सरकार ने चार साल पूरी मेहनत से प्रदेश की जनता के हित के  लिए  कार्य किया है। जिसका परिणाम है कि जनता का भरोसा हमारी सरकार में बढा  है।  जहां तक बात चुनावी तैयारियों की है तो हमने शपथ ग्रहण करने के दिन  से ही  जनता का कार्य किया है। जनता का दुख दर्द महसूस किया है और  प्राकृतिक आपदा  रही हो या अन्य कोई भी अवसर हमने सीधे जनता से संवाद  स्थापित किया है।  जिसका उदाहरण हमारी अन्त्योदय विकास यात्रा है जिसके तहत  अभी तक मैं स्वंय  34 विधानसभा क्षेत्रों में जा चुका हूं और वहां भाषण  देने की बजाय सीधे  उनकी समस्याओं को सुनता हूं और उनका वहीं पर निस्तारण  करने की भी कोशिश  करता हूं। प्रशासनिक स्तर की लापरवाही को मैने कभी  बर्दास्त नहीं किया और  जिस अफसर के खिलाफ शिकायत मिलती है उसे तत्काल सबक  सिखाता हूं। इस अभियान  के तहत अभी तक सवा तीन लाख लोगों से संवाद स्थापित  कर चुका हूं। सभी 70  विधानसभा सीटों के सात लाख लोगों संवाद स्थापित करने  का लक्ष्य है। मेरी  विकास यात्राओं में जनता की अच्छी खासी भीड जुट रही  है। जिससे सरकार को  लेकर जनता का रवैया स्पष्ट दिखता है। रही बात चुनाव की  तो 2012 में भाजपा  की हर हाल में सत्ता में वापसी सुनिश्चित है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न-2ः सरकार पर लगातार हो रहे न्यायिक हमलों के बारे में आपका क्या कहना है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; उत्तर-देखिए ये राजकाज है। हर सरकार को ऐसे हमले झेलने पडते है कुछ तत्व   ऐसे होते है जो सरकार को ऐसे कार्यो में उलझाए रखना चाहते है। लेकिन सरकार   ऐसे कुत्सित प्रयत्नों से लडने के लिए हमेशा तैयार रहती है। आप देख सकते  है  अभी तक सरकार को जिन-जिन मामलों में न्यायालय में घसीटा गया,उस पर झूठे  और  बेबुनियाद आरोप लगाए गए उन सबका न्यायालय में क्या हश्र हुआ। लेकिन  इसके  बाद भी सरकार को बराबर ऐसे मामलों में उलझा कर रखने की कोशिश की जा  रही है  तो इसका हम बुरा भी नहीं मानते ठीक है ये लोकतंत्र है इसमें सबको  हमारे  कामकाज पर उंगली उठाने का हक है। हम  ऐसे आरोपों का व्यक्तिगत स्तर  से लेकर  न्यायालय तक तथ्यात्मक जवाब देने के लिए तैयार है और इससे हमारा  मनोबल  नहीं गिरने वाला है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न-3ः सत्ता में वापसी को लेकर आप में जो आत्मविश्वास दिख रहा है उसका क्या आधार है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; उत्तर- देखिए 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद आम   कार्यकर्ता मायूस और निराश था। लेकिन आज सभी की कडी मेहनत के बाद वहीं   कार्यकर्ता पूरे आत्मविश्वास और जोश से भरा हुआ है। कार्यकर्ताओं का यही   जज्बा हमारी वापसी का मुख्य आधार है। इसके साथ ही कम समय में सरकार ने   प्रदेश का जैसा विकास किया और जनहित की जो योजनाएं लागू की जैसे स्वास्थ्य   के क्षेत्र में 108 ने विश्वकीर्तिमान बनाया,अटल खाद्यान्न योजना,अटल  आदर्श  गांव,मिनी सचिवालय,गौरादेवी कन्या धन योजना,संस्कृत को द्वितिय   राजभाषा,आयुष ग्राम की स्थापना,ऑटोमोबाइल क्षेत्र में उत्तराखंड एशिया का   नंबर वन राज्य, देश की सबसे बडी फार्मासिटी उत्तराखंड में, पूरे देश में   उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य जहां मात्र 15 हजार रूप्ए में कोई भी होनहार युवक   चिकित्सा की पढाई क र सकता है। प्रदेश के सिडकुल,पिटकुल आदि क्षेत्र  मुंबई  को भी पीछे छोड रहे है। इन कार्यो का लाभ हमें चुनावों में मिलना तय  है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न-4ः प्रदेश में पर्यटन और उद्योग के विकास के लिए सरकार क्या कर रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; उत्तर- प्रदेश में पर्यटन और उद्योग के विकास के लिए सरकार पूरी तरह से   गंभीर है। पहले भी हमने बताया कि कई क्षेत्रों में आज छोटे राज्य होने के   बावजूद हम पूरे देश में नंबर वन है। इसके बावजूद सरकार ने पर्यटन और उद्योग   के विकास के लिए अलग अलग योजनाएं बनाईं है। अभी पिछले दिनों नरेन्द्र नगर   में केन्द्रीय पर्यटन मंत्री आए थे उनसे भी हमारी वार्ता हुई और उन्होंने   हमारे प्रस्तावों पर सहमति प्रदान की है। हमारी योजना उत्तराखंड को धरती  के  स्वर्ग के रूप में विकसित करने और प्रचारित करने की है। प्रदेश में  साहसिक  पर्यटन को बढावा देने के लिए 107 निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की  रिवर  राफ्टिंग कंपनियों को परमिट दिया गया है। औली को विश्वस्तरीय  शीतक्रीडा का  केन्द्र बनाया गया है और टिहरी में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का  जल क्रीडा  केन्द्र बनाया जा रहा है। इसके साथ ही पर्यटन ग्राम,वीरचंद्र  सिंह गढवाली  पर्यटन स्वरोजगार योजना,जापान इंटरनेशनल ऑपरेशन एजेंसी के  सहयोग से चारों  धामों तथ हेमकुंड साहिब यात्रा एवं कैलाश मानसरोवर यात्रा  में आधारभूत  सुविधाओं के निर्माण और विकास के लिए 25172.55 लाख रूपए की  योजनाएं  प्रस्तावित है। प्रदेश में कई नए पर्यटन सर्किटों की स्थापना का  भी कार्य  तेजी से चल रहा है। सरकार ने पर्यटन को रोजगार से जोडा है और  पूरे साल देश  विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए टै्रकिंग,रीवर  राफ्टिंग,स्कीइंग  जैसे साहसिक क्रीडा के कार्यक्रमों को प्रोत्साहित कर  रही है।सांस्कृतिक  पर्यटन के अन्तर्गत इस क्षेत्र में आयोजित होने वाले  मेले,त्यौहारों,कुंभ  मेला,अर्द्वकुंभ मेला,कावंड मेला,नन्दादेवी  राजजात,आदि आयोजनों के व्यापक  प्रचार प्रसार से पर्यटकों को आकर्षित किया  जा रहा है। पिछले साल हरिद्वार  में सपन्न हुए महाकुंभ ने राज्य को पूरी  दुनिया में एक अलग पहचान दी है।  सरकार के ऐसे प्रयासों से हम जल्द भारत के  नंबर वन पर्यटन राज्य बन  जाएंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न-5ः सरकार के विजन-2020 की बहुत चर्चा है। इसके बारे में कुछ बताएं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; उत्तर- भाजपा सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को वर्ष 2020 में देश का मॉडल   स्टेट बनान है। जिसके लिए सरकार पांच सूत्रों समृ़़ध्द उत्तराखंड,शिक्षित   उत्तराखंड, स्वस्थ उत्तराखंड,सुस्ंकृत उत्तराखंड और हरित उत्तराखंड को   लक्ष्य मानकर कार्य कर रही है। इसके साथ ही हमने कुछ बिंदु तय किये है   जिसको विकास का आधार बनाया गया है। जैसे नई पहचान,बढा सम्मान,उत्तराखंड   शासन सस्ता राशन,विकास के शिवालय ग्राम सचिवालय,रोजगार के खुले द्वार,सबकी   रक्षा सबको सुरक्षा,मां-बेटियों का मान असली सम्मान,तन चंगा,मन   गंगा,आयुर्वेद और स्पर्श गंगा,देववाणी के सम्मान से बढा देवभूमि का   मान,विकास के द्वारा खोलती सरकार,आओं मिलजुल कर दें आकार,सुराज का संकल्प   करें साकार,उत्तरोत्तर बृद्वि बढी समृद्वि और संस्कृति के साथ संस्कार भी।   इन विंदुओं को ध्यान में रखकर  सरकार आगे बढ रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न-6ः प्रदेश में नदियों के संरक्षण को लेकर सरकार कितनी सक्रिय है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; उत्तर- सरकार गंगा,यमुना समेत प्रदेश की छोटी नदियों के संरक्षण के लिए भी   गंभीर है। स्पर्श गंगा अभियान के माध्यम से हमने सभी नदियों को स्वच्छ  करने  का बीडा उठाया है। इसमें जनसहभागिता भी हो तो लक्ष्य जल्दी मिल सकता  है।  सरकार ने इस अभियान को आम जनता से जोडने के लिए पूरा प्रयास किया है।  इसके  साथ ही शासन ने हिमालय की उपत्यका में 50 लाख रूपए की लागत से  हिमालयी  संास्कृतिक केन्द्र बनाने की योजना बनाई है। उत्तरकाशी में  आयुर्वेद की  विशिष्ट चिकित्सा पद्वति पंचकर्म,क्षारसूत्र आदि से सुसज्जित  नवीन पंचकर्म  चिकित्सा भवन के निर्माण के साथ ही अत्याधुनिक उपकरण भी  उपलब्ध कराएं हैं।  आयुष ग्राम की स्थापना का उद्देश्य प्रदेश को हर्बल हब  बनाना और उससे  रोजगार का श्रृजन करना है। सरकार ने गौवंश के संरक्षण के  लिए गोसेवा आयोग  बनाया है और गौ आधारित उत्पादों के लिए विशेष छूट प्रदान  कर रही है। गौ  संरक्षण को रोजगार से भी जोडा जा रहा हैै।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न-7ः पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर सरकार ने कई योजनाएं चला रखी है इसका कोई विशेष कारण।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; उत्तर- पूर्व प्रधानमंत्री पंडित अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे प्रधानमंत्री   रहे जिन्होंने उत्तराखंड आन्दोलन को भरपूर समर्थन और सहयोग दिया।   प्रधानमंत्री बनने पर उन्होंने ही इस राज्य के गठन को मंजूरी दी। उत्तराखंड   सरकार उनके इस योगदान के लिए कृतज्ञ है और इसी वजह से वह इन योजनाओं को   उनका नाम देकर कृतज्ञता जताती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न-8ः पार्टी में गुटबाजी चर्चाएं अक्सर होती रहती है इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; उत्तर- पार्टी में किसी भी तरह की कोई गुटबाजी नहीं है। इसी का परिणा है  कि  हमनें लगातार उपचुनावों में विजय पाई है। कुछ लोग ऐसी अफवाहें फैलाते  रहते  है जिसपर मैं ध्यान नहीं देता। जहां परिवार बडा होता है वहां कभी कभी  कोई  छोटी मोटी घटना हो भी जाती है तो उसे गुटबाजी कहना ठीक नहीं होता।  पार्टी  पूरी तरह एकजुट है हमारे वरिष्ठ नेता लगातार जनता के संपर्क में है  और  सरकार भी उनके मार्गदर्शन में उनसे मिलने वाले सुझावों पर कार्य करने  में  कोई कसर नहीं छोड रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न-9ः पार्टी विधानसभा चुनाव किसके नेतृत्व में लडेगी और उसकी तैयारियां क्या है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; उत्तर- देखिए मैं आपसे पहले भी कह चुका हूं कि हमें चुनावी तैयारियों की   जरूरत ही नहीं है। हम निरन्तर और पुूरी ईमानदारी से जनता का कार्य कर रहे   हैं और हमारा काम ही जनता के कार्य को अंजाम देना है। जवाब तो जनता देगी।   जहां तक बात किसके नेतृत्व में चुनाव लडन की है तो मैं तो मानता हूं कि   चुनाव का नेतृत्व स्वयं जनता करती है। बात भाजपा की करें तो हमारी पार्टी   अटल-आडवाणी-गडकरी के नेतृत्व में विश्वास करती है और इन्हीें लोगों के   मार्गदर्शन में चुनाव लडा जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न-10- हिन्दुस्थान समाचार के मंच के माध्यम से जनता को क्या संदेश देना चाहेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; उत्तर- इस मंच के माध्यम से मैं प्रदेश की जनता को सरकार के ड्रीम   प्रोजेक्ट विजन-2020 में सहभागी बनने का आमंत्रण देता हूं। जिससे हम वर्ष   2020 में देश को उत्तराखंड के रूप  में एक मॉडल स्टेट दे सकें। इसके साथ ही   उत्तराखंड को धरती का स्वर्ग बनाने में लोगों के सहयोग की अपेक्षा रखता   हूं जिससे पूरी दुनिया को इस देवभूमि पर आने और सबकुछ पाने का आमंत्रण दे   सकूं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रस्तुति--धीरेन्द्र प्रताप सिंह ब्यूरो प्रमुख हिन्दुस्थान समाचार उत्तराखंड&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-5971875203365659875?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/5971875203365659875/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=5971875203365659875' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/5971875203365659875'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/5971875203365659875'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2011/05/blog-post.html' title='२०१२ में भाजपा की सत्ता में वापसी तय-निशंक'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-4226614163629055429</id><published>2010-10-03T09:14:00.001-07:00</published><updated>2010-10-03T09:14:39.330-07:00</updated><title type='text'>निशंक पर निशाने का अजीब तरीका</title><content type='html'>निशंक पर निशाने का अजीब तरीका&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पिछले कई दिनों से उत्तराखंड में मुख्यमंत्री के विरोधियों ने उनकों बदनाम करने का नया तरीका ढूंढ लिया है। उनके जनहित के कार्यो से बौखलाएं विपक्षियों ने अब मीडिया के कंधे पर बंदूक रख कर उन पर निषाना साधना षुरू कर दिया है। लेकिन मुख्यमंत्री ऐसे हमलों को दरकिनार कर अपने राज्य में आई प्राकृतिक आपदा से जूझते लोगों के आंसू पोछने में व्यस्त है। उनके इस संयम ने उनके विरोधियों की योजनाओं पर पानी फेर दिया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुख्यमंत्री डा. रमेष पोखरियाल निषंक निष्चित ही देष के ऐसे एकमात्र मुख्यमंत्री है जिनके पास एक चतुर राजनेता होने के साथ ही मंझा हुआ पत्रकार और संवेदनषील साहित्यकार व भावुक कवि होने का अनुभव भी है और ष्षायद यही कारण है मात्र एक साल के अल्प कार्यकाल में उन्होंने जो लोकप्रियता और प्रसिद्धि अर्जित की है वह चमत्कार सी दिखलाई पड़ती है। मैं ये सारी बाते हवा में नहीं कह रहा हूं बल्कि इसके प्रत्यक्ष प्रमाण है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज पूरे भारत में उन्हें सबसे युवा,सर्वोत्तम मृदुभाषी और निरन्तर जनहित का चिन्तन करने वाला राजनेता माना जाता है। ऐसा सिर्फ उनकी पार्टी भाजपा नहंी बल्कि विपक्षी कांग्रेस भी मानती है। पूरा देष उनमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की छवि देखता है। 27 जून 2009 को उत्तराखंड के पांचवें मुख्यमंत्री के तौर पर जब उन्होंने कार्यभार संभाला तो उनके सामने एक नहीं कई चुनौतियां थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक तरफ जहां लोकसभा चुनाव में प्रदेष से पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया था वहीं विकास नगर का उपचुनाव उनके सामने मुंह बाएं खड़ा था। चूंकी लोकसभा में हार का ठीकरा बीसी खंडूरी के सिर फोड़ा गया था तो उनसे इस चुनाव में निष्पक्ष मदद की गुंजाइष कम थी। जबकि दूसरी तरफ खुद को मुख्यमंत्री बनने की आस लगाए भगत सिंह कोष्यारी भी रमेष के मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर बहुत खुष नहीं थे। लेकिन निषंक ने अपने सद् व्यहार और राजनैतिक चातुर्य से न सिर्फ विकास नगर विधानसभा उप चुनाव को जीता बल्कि राज्य में कई लॉबियों में बंटी पूरी पार्टी को एकजुट करने में भी कामयाबी हासिल की।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस सफलता के बाद ष्षुरू हुआ उनका सफर तेजी से आगे बढ़ा फिर उनके सामने आया सदी का सबसे बड़ा आयोजन कुंभ 2010। इसमें भी मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक कौषल से जहां केन्द्र से अच्छी खासी मदद हासिल की वहीं उस पैसे का दुरूपयोग न हो सके इसका पूरा प्रबंध किया। फिर उनके इस कार्य ने ऐसा करिष्मा दिखाया कि महाकुंभ-2010 अब तक का सबसे अच्छा और सफल आयोजन साबित हुआ। इस कुंभ में जहां पहली बार हरिद्वार में सबसे ज्यादा पक्का काम हुआ वहीं छोटे से स्थान में करोड़ों लोगों के नहाने के प्रबंध और उनकी सुरक्षा की व्यवस्था ने उत्तराखंड को पूरी दुनिया में एक मॉडल स्टेट के रूप में प्रस्तुत किया। अमेरिका के एक प्रबंधन विषेषज्ञ ने इसे प्रबंधन का सबसे बेहतरीन उदाहरण बताते हुए अपने संस्थान के कोर्स में इसे ष्षामिल करने का आदेष दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस बीच मुख्यमंत्री अपने विपक्षियों की साजिषों से भी लगातार दो चार होते रहे। प्रदेष में लगने वाली जल विद्युत परियोजनाओं के आवंटन में जहां उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे वहीं पूरी मीडिया ने भी उनको कटघरे में खड़ा किया लेकिन वे इससे घबराने की बजाय अपने तर्को और तथ्यों के साथ अपनी बेगुनाही का सुबूत पेष किया। इतना ही नहीं इस मामले में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने जब उन्हें क्लीन चिट दे दी और बाद में इस मामले में उन्हें लगा कि कुछ गलत हो सकता है। उन्होंने तुरंत उन परियोजनाओं के आवंटन को रद्द कर दिया और उसके दोबारा और पारदर्षी आवंटन का आदेष जारी कर दिया। इस मामले में देखा जाए तो इससे पहले प्रदेष में उर्जा की कोई नीति ही नहीं बनी थी । उन्होंने तुरंत इसको गंभीरता से लिया और उत्तराखंड उर्जा नीति का निर्माण किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खैर ये तो उनके राजनैतिक कौषल की बात हो गई। प्रदेष के अनुभवी लोगों से इस बारे में बात करने पर लोग कहते है कि डा. निषंक एक अत्यन्त ही गरीब किसान परिवार से आते है और उन्होंने प्रदेष की समस्याओं को बहुत ही नजदीक से न सिर्फ देखा है बल्कि उसे झेला भी है। यही कारण है कि उन्होंने 1991 में कर्ण प्रयाग विधानसभा सीट से दिग्गज कांग्रेसी षिवानन्द नौटियाल को पछाड़ दिया था। क्यों कि इन्होंने पूरे चुनाव में व्यवहारिकता को महत्व देते हुए चुनाव प्रचार किया था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस लेख मैं उनका महिमा मंडन नहीं करना चाहता हूं लेकिन उनके बहुआयामी व्यक्तित्व के कुछ पहलुओं से अवगत कराने के लिए इन सबका उल्लेख आवष्यक था इसलिए कर दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब आते है पत्रकारों के साथ उनके व्यवहार की बातों पर। उन्होंने अपना अखबार सीमान्तवार्ता तब ष्षुरू किया जब अखबार निकालना घाटे का सौदा माना जाता था। उनके पत्रकारीय अनुभव और मानवीय गुणों के चलते सीमान्तवार्ता अखबार देहरादून का लोकप्रिय अखबार बना। इस अखबार के प्रकाषन के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता का व्यहारिक प्रषिक्षण प्राप्त किया।&lt;br /&gt;आज षायद वे देष के एक मात्र अकेले ऐसे मुख्यमंत्री है जो किसी भी प्रेसकांफ्र्र्रेेस में सभी पत्रकारों को उनके नाम से बुलाते है और न केवल उनका हालचाल लेते है बल्कि जितना संभव होता है सार्वजनिक और व्यक्तिगत दोनों स्तरों पर उनकी मदद भी करते है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस बात की पुष्टि देहरादून के किसी भी पत्रकार से की जा सकती है। हां चूकी ये प्रदेष बने अभी मात्र 10 साल ही हुए है और कई ऐसी परंपराएं है जिनमें अभी सुधार होना बाकी है तो कई गलत परंपराएं भी यहां विकसित हुई है। उन्ही गलत परंपराओं का विरोध करने पर अगर कोई पत्रकार मुख्यमंत्री को अपना दुष्मन मान ले और उन पर पत्रकारिता के दमन करने का आरोप लगाने लगे तो उसको किसी भी तरह रोका नहीं जा सकता। दूसरा इस प्रदेष में षासन के साथ ही प्रषासन नाम की चीज भी है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रषासन जो भी काम करता है वह कानून की हद में करता है और अगर ऐसा नहीं करता है तो उसकी मुखालफत भी की जा सकती है जिसके लिए हर व्यक्ति स्वतंत्र है। तो प्रदेष का कोई अधिकारी वह चाहे पुलिस प्रषासन का हो या सूचना एवं लोक संपर्क विभाग का उसके किसी कार्य को मुख्यमंत्री द्वारा रचित साजिष घोषित करना बिल्कुल गलत है। जिसका पिछले दिनों खूब हल्ला किया गया और बेबुनियाद आरोप लगाए गए। जहां तक बात रही मुख्यमंत्री और पत्रकारों के बीच संबंधों की तो इसका प्रमुाण है प्रदेष के सम्मानित पत्रकार आलोक अवस्थी,षाक्त ध्यानी,मनमोहन षर्मा,उमेष जोषी आदि आदि। इन सभी लोगों के यहां बिगत दिनों किसी न किसी की मृत्यू हुई और मुख्यमंत्री किसी के घर जा कर तो किसी को फोन पर बात कर अपनी पूरी सहानुभूति जताई और सभी प्रकार की मदद करने का आष्वासन दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके बाद भी जब एक पत्रकार संगठन ने सरकार पर आरोप लगाए तो उन्होंने तुंरत उसका संज्ञान लिया और उनकी षिकायतों का तत्काल निवारण किया।  दूसरा पत्रकारों के प्रति उनके मन में कितनी संवदेना है इसका एक और उदाहरण देहरादून के ख्यातिलब्ध पत्रकार संजय श्रीवास्तव जो उत्तर प्रदेष के जौनपुर जनपद के निवासी है लेकिन राज्य गठन से पहले से ही यहां की पत्रकारिता की एक पत्रकार के रूप में सेवा कर रहे है। उन्हें मुख्यमंत्री बिगत दिनों अपनी जौनपुर यात्रा के दौरान अपनी पहल पर अपने विषेष विमान में अपने साथ सिर्फ इसलिए लेकर गए जिससे उनके जनपद में संजय का सम्मान होने के साथ ही ये बात भी साबित हो सके  िकइस प्रदेष की सेवा करने वाले हर व्यक्ति के लिए मुख्यमंत्री के हृदय में कितना सम्मान है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैं यहां एक छोटा पत्रकार हूं मेरा यहां के ष्षासन प्रषासन से कुछ लेना देना नहीं लेकिन एक अच्छे व्यक्ति के चरित्र हनन को लेकर हो रहे कुत्सित प्रयासों को सहन न करने की स्थिति में ये विचार और उद्गार व्यक्त करने का विचार बना।&lt;br /&gt;धीरेन्द्र प्रताप सिंह&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-4226614163629055429?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/4226614163629055429/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=4226614163629055429' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/4226614163629055429'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/4226614163629055429'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2010/10/blog-post.html' title='निशंक पर निशाने का अजीब तरीका'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-7836564994239139080</id><published>2010-09-27T03:25:00.001-07:00</published><updated>2010-09-27T03:25:44.070-07:00</updated><title type='text'>उत्तराखंड पर भी मंडरा रहे है नक्सली संकट के बादल-डीजीपी</title><content type='html'>उत्तराखंड पर भी मंडरा रहे है नक्सली संकट के बादल-डीजीपी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उत्तराखंड देष का नव श्रृजित किंतु अन्तर्राश्ट्रीय सीमाओं से लगा होने के चलते काफी महत्वपूर्ण राज्य है। देष में लगातार बढ रहे नक्सली प्रभाव का संकट अब यहां भी महसूस किया जा रहा है। यह बात न केवल प्रदेष के मुख्यमंत्री बल्कि पुलिस प्रषासन भी कहीं दबी जुबान तो कहीं खुल कर मानने लगा है। प्रदेष की नेपाल और चीन से लगती सीमाएं काफी संवेदनषील हो चली है। मुख्यमंत्री जहां इसके लिए केन्द्र से विषेश सुविधाओं की मांग कर रहे है वहीं पुलिस के मुखिया सीमाओं पर चौकसी की व्यवस्था को लेकर चिंतित नजर आ रहे है।&lt;br /&gt;इन्ही सब मुद्दों पर हाल ही में प्रदेष के पांचवंे पुलिस महानिदेषक के तौर पर कार्यभार संभालने वाले 1976 बैच के आईपीएस ज्योतिस्वरूप पांडे से हिन्दुस्थान समाचार उत्तराखंड के ब्यूरो प्रमुख धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने बातचीत की। प्रस्तुत है उस बातचीत के मुख्य अंष।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-हि.स.- प्रदेष की अन्तर्राश्ट्रीय सीमाओं को लेकर आपके विचार क्या हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डीजीपी- देखिए उत्तराखंड राज्य छोटा किन्तु अन्तर्राश्ट्रीय सीमाओं वाला दुर्गम राज्य है। इसकी सीमाएं चीन और नेपाल जैसे देषों से लगती है। जो अपने आप में ही सामरिक दृश्टि से काफी महत्वपूर्ण और संवेदनषील हैंे। चीन से लगती जो सीमाएं है वे रिमोट सीमाएं है और कुछ ऐसे क्षेत्र भी है जो वर्श भर बर्फ से ढके रहते हैं। वहां पुलिसिंग की कोई व्यवस्था अभी तक नहीं है। दूसरी सीमा भारत-नेपाल सीमा है। चूंकी ये सीमा खुली सीमा है और इसी वजह से यहां पर समस्याएं भी अधिक हैं। दोनों देषों को काली नदी सीमांकित करती है। लेकिन इस नदी के आर पार जाने के लिए कोई रोक टोेक नहीं है। कोई भी जांच का प्रावधान नहीं है। जिससे लोग आसानी से एक देष की सीमा से दूसरे देष में जा सकते हैं। इन सीमाओं पर पिछले 10 साल से भारत सरकार ने सषस्त्र सीमा पुलिस को सुरक्षा का जिम्मा दे रखा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-हि.स.- क्या प्रदेष पुलिस यह मानती है कि उत्तराखंड में सीमाओं को लेकर कोई समस्या नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डीजीपी- नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। प्रदेष पुलिस ऐसा नहीं मानती है। लेकिन प्रदेष पुलिस का कहना है कि  इन सीमाओं पर सामान्य चेकिंग हो सकती है। जिससे हथियार,विस्फोटक,मादक पदार्थो की तस्करी पर रोक लगाई जा सकती है। लेकिन कई स्थान ऐसे है जहां से असामाजिक तत्व अपनी समाजविरोधी गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं। प्रदेष पुलिस का मानना है कि ऐसे स्थानों के लिए खास सुरक्षा इंतजाम किये जाने चाहिए। रही बात प्रदेष में इन सीमाओं को लेकर संकट की तो उत्तर प्रदेष और बिहार की तुलना में उत्तराखंड की सीमाएं ज्यादा सुरक्षित है। हां बनबसा और खटीमा से लगते क्षेत्रों में कुछ समस्याएं जरूर है। लेकिन उसकी सुरक्षा के लिए पुलिस सदैव अलर्ट है। हालांकि नेपाल में बढते माओवाद के प्रभाव से देष में हो रही नक्सली घटनाओं को देखते हुए यहां भी नक्सली तत्वों के विकास की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन इन क्षेत्रों में अभी तक कोई ऐसा दृश्टांत नहीं मिला है जिससे साबित हो सके कि इन क्षेत्रों में नेपाली माओवादी गतिविधियां संचालित हो रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-हि.स.- क्या आप ये दावा कर रहे है कि प्रदेष में अभी तक नक्सली गतिविधि के कोई संकेत नहीं मिले हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डीजीपी- जी बिल्कुल नहीं। मैं तो कह रहा हूं कि विगत दिनों उत्तराखंड में भी कुछ ऐसी घटनाएं पकड़ में आई हैं जिसमें ऐसी घटनाओं की साजिष का भंडाफोड़ हुआ है और ऐसी साजिषों के संकेत मिले। लेकिन पुलिस की सक्रियता ने उन्हें निश्क्रिय कर दिया। इन घटनाओं को देखते हुए प्रदेष में नक्सली घटनाओं के घटित होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। इन घटनाओं को होने की आंषका इसलिए भी अधिक हो जाती है कि प्रदेष का एक बडा हिस्सा वनाच्छादित है और नियमित और सामान्य सुरक्षा से दूर है और नक्सली ऐसे क्षेत्रों की तलाष में रहते है। इसलिए ऐसी संभावनाएं बरकरार हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-हि.स.- उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों की सुरक्षा के लिए पुलिस की कोई विषेश योजना या विलेज विजिलेंसी की वर्तमान स्थिति के बारे में बताएं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डीजीपी- देखिए ये सवाल बहुत ही संवेदनषील है। लेकिन मैं आपकांे बताना चाहूंगा कि सीमावर्ती गांवों को लेकर पुलिस बिल्कुल संजीदा है और अलर्ट है। रही बात विलेज विजिलेंसी की तो पुलिस इन क्षेत्रों पर विषेश नजर रखती है और हिसंक घटनाओं या शडयंत्रों को समय रहते निश्क्र्रिय करने के लिए अपना नेटवर्क बना रखी है जिसके माध्यम से ऐसी गतिविधियों पर रोकथाम का प्रयास लगातार जारी रहता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-हि.स.- पिछले दिनों हुई कुछ घटनाओं को लेकर पुलिस का मनोबल गिरने की बात भी की जा रही है। इसमें कितनी सत्यता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डीजीपी- देखिए पुलिस का काम किसी भी समस्या को तत्काल प्रभाव से रोकना और उसका निदान करना है। इसके लिए पूरे देष में पुलिस ही एक मात्र वह एजेंसी है जिसको सरकार ने न्यूनतम् बल प्रयोग का अधिकार भी दे रखा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पुलिस उस बल प्रयोग के अधिकार का बेजा इस्तेमाल करे और जनता को परेषान करे। पुलिस को इस अधिकार का प्रयोग बहुत ही सजगता के साथ करना पडता है और सिर्फ कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने के लिए ही किया जाता है। रही बात पुलिस के मनोबल गिरने की तो मैं बताना चाहूंगा कि प्रदेष पुलिस का मनोबल बिल्कुल उंचा है और वो अपना कार्य पूरी ईमानदारी से कर रही है। पुलिस की ड्यूटी ही संघर्श,गाली और गोली से षुरू होती है। इसलिए उसका मनोबल इन तीनों तत्वों से कभी भी प्रभावित नहीं होता।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-हि.स.- पुलिसिंग सिस्टम में बदलाव को लेकर आपके क्या विचार है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डीजीपी- देखिए कोई भी सिस्टम हो उसमें समय के साथ बुराईयां आती ही है और समय के अनुसार ही उसमें बदलाव भी किए जाते है। इसलिए आज के पुलिसिंग सिस्टम की बात की जाए तो समय के साथ पुलिस के कार्यो में विभिन्नता आई है नई चुनौतियां और अपराध के नए तौर तरीके भी आए हैं उसके हिसाब से तो सिस्टम में बदलाव की जरूरत महसूस की जा सकती है। लेकिन इसके इतर तात्कालिक तौर पर पुलिस सिस्टम के सामने सबसे बडी चुनौती अपराध एवं षांति व्यवस्था को बनाए रखते हुए मानवाधिकारों की संपूर्ण सुरक्षा है। इस उद्देष्य को प्राप्त करने के लिए जो सुधार आवष्यक हो वो किए जाने चाहिए। इसके साथ ही पुलिस में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करना भी समय की सबसे बडी मांग है। पुलिस समस्याओं से निपटने के लिए मानवाधिकारों के हनन का रास्ता अपनाने की बजाय अपराधों का विस्तृत विष्लेशण करे और थर्ड डिग्री जैसी बुराईयों से बचते हुए निरोधात्मक कार्रवाई करे तो षायद यही सबसे बडा सुधार माना जाएगा। मैं मानता हूं कि कुछ केष ऐसे होते है जो पेचीदे हो जाते है जिसे सुलझाने के लिए ऐसे रास्ते अपनाने पड़ते है लेकिन अगर ऐसे मामले में जनता का विष्वास जीतते हुए उसका सहयोग लिया जाए और विक्टिम पर ज्यादा ध्यान दिया जाए तो षायद मामले का आसान हल भी मिल जाएगा और मानवाधिकारों की रक्षा भी हो सकेगी। इसके साथ ही मेरा मानना है कि पुलिस को किसी भी मामले को सुलह समझौते के आधार पर सुलझााने का प्रयास करना चाहिए इसमें समाज और सिस्टम दोनों का हित होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-हि.स.-उत्तराखंड में जेलों की दषा पर कोई टिप्पणी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डीजीपी- देखिए जेलों की दषा पूरे देष में एक जैसी है। हर जगह जेलें क्षमता से अधिक कैदियों की समस्याओं से जूझ रही है। इसका तात्कालिक हल यहीं है कि पुलिस सिस्टम में कार्यो के मूल्यांकन का आधार गुणात्मक हो न कि संख्यात्मक। लेकिन ऐसा हैं नहीं पुलिस अपनी सीआर अच्छा बनाने के चक्कर में संख्यात्मक प्रदर्षन ज्यादा करती है। जिसके चलते जेलों में कैदियों की संख्या बढती है। इसलिए मेरा मानना है कि पुलिस को उसी के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो वाकई में अपराधी हो और ऐसा तभी हो पाएगा जब पुलिस के कार्यो के आकलन का आधार क्वांटिटेटिव नहीं बल्कि क्वालिटेटिव होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-हि.स.-उत्तराखंड पुलिस के लिए सबसे बडी चुनौती इस समय क्या है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डीजीपी- मेरी नज़र में तो पुलिस के सामने हर समय चुनौती ही रहती है। लेकिन फिर भी यदि प्रदेष पुलिस के सामने चुनौती की बात करे तो मेरे हिसाब से मानवाधिकारों के सम्मान के साथ उनका संरक्षण करते हुए समाज की समस्याओं को दूर करना ही सबसे बडी चुनौती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-हि.स.- हिन्दुस्थान समाचार केे माध्यम से प्रदेष पुलिस को कोई संदेष देना चाहेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डीजीपी- इस मंच के माध्यम से प्रदेष की पुलिस को मैं कहना चाहूंगा कि वे मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए प्रदेष की सेवा करे और धैर्य रखकर मामलों का निस्तारण करे। वे इस बात का ध्यान रखे  िकवे समस्याओं को सुलझाने के लिए है उलझाने के लिए नहीं। सबका सहयोग लेते हुए कानून एवं व्यवस्था,यातायात,जन सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कुषलतापूर्वक करे यही उनके लिए मेरा संदेष है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-हि.स.-इस मंच के माध्यम से प्रदेष की जनता को क्या संदेष देना चाहेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डीजीपी- प्रदेष की प्रबुद्ध जनता को मैं यहीं संदेष देना चाहूंगा कि किसी भी वारदात या समस्या के समाधान को लेकर वह ज्यादा दबाव न बनाए। क्यों कि पुलिस के पास भी कोई ऐसा तंत्र नहीं है  िकवह पलक झपकते ही किसी भी समस्या का समाधान कर दे। जनता पुलिस का सहयोग करे और किसी भी समस्या के जल्द समाधान के लिए पुलिस पर धरना प्रदर्षन व अन्य माध्यमों से दबाव बनाने पर पुलिस का ध्यान भंग होता है और वारदात को वर्कआउट करने में समय लगता है। इसलिए जनता पुलिस मित्र बन कर कानून एवं व्यवस्था स्थापित करने में पुलिस की मदद करे यही समाज के हित में होगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रस्तुति- धीरेन्द्र प्रताप सिंह ‘‘ब्यूरो प्रमुख हिन्दुस्थान समाचार उत्तराखंड’’&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-7836564994239139080?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/7836564994239139080/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=7836564994239139080' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/7836564994239139080'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/7836564994239139080'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2010/09/blog-post_6738.html' title='उत्तराखंड पर भी मंडरा रहे है नक्सली संकट के बादल-डीजीपी'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-3645365127283184932</id><published>2010-09-27T03:20:00.000-07:00</published><updated>2010-09-27T03:22:09.857-07:00</updated><title type='text'>साक्षात्कार ---चारधाम विकास परिषद्</title><content type='html'>सरकार के विजन-2020 से बदलेगी चारधाम की सूरत-सूरतराम नौटियाल&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पूरे देष की आस्था के प्राण और उत्तराखंड में राजस्व के बडे श्रोत के तौर पर स्थापित प्रदेष के चार धाम अर्थात यमुनोत्री,गंगोत्री,बद्रीनाथ और केदारनाथ को भी सरकार के विजन-2020 का लाभ मिलेगा और इनका विकास कर विष्व के आकर्शण का केन्द्र और प्रदेष का राजस्व बढाने की सरकार ने योजना बनाई है। इस रणनीति के तहत कई योजनाएं बनाई गई हैं और इनका क्रियान्वयन भी षुरू हो गया है। प्रस्तुत हैं इन्ही सब मुद्दों पर चारधाम विकास परिशद के उपाध्यक्ष सूरतराम नौटियाल की हिन्दुस्थान समाचार के उत्तराखंड ब्यूरो प्रमुख धीरेन्द्र प्रताप सिंह से हुई बातचीत के प्रमुख अंष।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-चारधाम को लेकर सरकार की क्या योजनाएं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूरतराम नौटियाल- पूरे देष की आस्था का केन्द्र विंदु और प्रदेष के राजस्व का बडा श्रोत होने के चलते चारोधाम सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन देष के जनमानस में जिस तरह का स्थान चारधाम को हासिल है वैसा विकास यहां नहीं हो सका। जिसे गंभीरता से लेते हुए सरकार ने चारधाम विकास परिशद का गठन किया। परिशद ने चारोधामों का विधिवत अध्ययन किया और इसके विकास की योजनाएं बनाई हैं। जिसका परिणाम भी दिखने लगा है। इस बार चारधाम यात्रा में रिकार्ड तोड तीर्थयात्री आ रहे है जबकि लोगों का मानना था कि महाकुंभ के तुरंत बाद आयोजित हो रही इस यात्रा में लोगों की आमद कम होगी। ऐसा सिर्फ सरकार की कोषिषों के चलते हुआ है। महाकुंभ की सफलता के तुंरत बाद सरकार ने इस यात्रा पर ध्यान लगाया और जिसका परिणाम है  िक इस यात्रा में पहले की तमाम समस्याओं को समय रहते ही समाप्त कर दिया गया। उच्च स्तरीय मूलभूत सुविधाएं मसलन,पेयजल,षौचालय,परिवहन,चिकित्सा आदि सुचारू व्यवस्थाओं ने लोगों को अधिक संख्या में यहां आने के लिए आकर्शित किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-चारधाम के विकास को लेकर सरकार और क्या कदम उठा रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूरतराम नौटियाल-चारो धामों के विकास के लिए सरकार ने सबसे पहले इन्हें वित्तीय मजबूती देने की योजना बनाई है। जिसके तहत जम्मू-कष्मीर के वैश्णों देवी और अमरनाथ श्राइनबोर्ड व हिमाचल प्रदेष के चिंतपूर्णी जैसे मंिदरों की तरह विकसित करने के लिए उन्हीं के तर्ज पर मंदिर विकास एक्ट या बोर्ड गठित करने पर विचार कर रही है। इसके लिए अभी मैं स्वयं अधिकारियों की टीम के साथ वैश्णों देवी और हिमाचल प्रदेष के तीर्थ स्थलों की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर लौटा हूं। वहां पर चिंतपूर्णी,ज्वाला जी,भद्रेष्वरी,चामुंडा देवी,समेत सभी मंदिरों की पूरी व्यवस्था सरकार के हाथ में है। वैश्णों देवी की व्यवस्थाएं भी श्राइनबोर्ड देखता है। टीम ने सभी जगह व्यवस्थाओं और एक्ट के बारे में अधिकारियों से बात की। चिंतपूर्णी हिमाचल का सबसे बडा टेंपल बोर्ड है जहां कुल आय का 40 फीसदी पुजारियों और 60 फीसदी सरकार के पास जाता है। इसी तरह वैश्णो देवी में सभी 11 पुजारी परिवार सेलरी पर काम कर रहे है। अभी पूरी टीम कर्नाटक के तिरूपति बालाजी,उडीसा के जगन्नाथ चेन्नई के रामेष्वरम् धाम भी जाएगी और वहां के व्यवस्थाओं का अध्ययन करेगी। इसके बाद अगले माह मुख्यमंत्री को अध्ययन रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। इस रिपोर्ट में चारधाम विकास परिशद बद्रीनाथ,केदारनाथ,गंगोत्री और यमुनोत्री की व्यवस्थाओं को एक ही जगह स्थापित करने पर बल देगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-इस एक्ट का चारधाम और विषेश कर आम जनता को कितना लाभ होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूरतराम नौटियाल- इस एक्ट के बनने से चारो धाम की व्यस्थाएं सरकार के हाथ में आएंगी जिससे आम जनता यानि यात्रियों को सडक,पानी,बिजली,समेत तमाम सुविधाएं बेहतर ढंग से मुहैया कराई जा सकेंगी। परिशद की यह पूरी कोषिष है कि अगले यात्रा से पहले ही ये एक्ट असतित्व में आ जाए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-चारांे धामों की प्रषासनिक और वित्तीय व्यवस्था पर सरकार के नियंत्रण और इस एक्ट से सबसे बडा क्या लाभ होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूरतराम नौटियाल- चारो धामों की प्रषासनिक और वित्तीय व्यवस्था सरकार के हाथ में आने पर जहां चारो धामों का समुचित विकास होगा वहीं वैश्णों देवी श्राइनबोर्ड की तर्ज पर देष विदेष से आने वाले तीर्थ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। इससे पुजारियों का हित भी सुरक्षित होगा। रही बात मंदिर एक्ट की तो एक्ट बनने के बाद जो सबसे बडा लाभ होगा वो यह कि वैश्णो देवी की तर्ज पर टोकन सिस्टम षुरू होगा जिससे ऋशिकेष से यात्रियों की संख्या उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार नियंत्रित की जा सकेंगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-चारों धामों में इस साल आने वाले तीर्थ यात्रियों का कोई डाटा है आपके पास।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूरतराम नौटियाल- चारांे धामों में इस बार आषा के अनुकूल रिकार्ड तोड यात्रियों ने आमद दर्ज कराई है। रही बात डाटा की तो बीते 9 अगस्त 2010 तक के दर्ज रेकार्ड के अनुसार 2009 में जहां 3 लाख,80 हजार,384 लोगों ने गंगोत्री दर्षन किए थे तो इस बार 9 अगस्त 2010 तक 3 लाख,47 हजार,468 यात्री दर्षन कर चुके है। इसी तरह यमुनोत्री में जहां 2009 में 3 लाख,22 हजार,864 यात्री आए तो वहीं इस बार 9 अगस्त 2010 तक 2 लाख,27 हजार,325 लोगों की आमद दर्ज की गई है। जबकि बद्रीनाथ में 2009 में 9 लाख,31 हजार,703 यात्री आए थे तो इस बार अभी तक 8 लाख,22 हजार,79 लोग आ चुके है। केदारनाथ में जहां 2009 में 4 लाख,3 हजार,353 लोग आए थे वहीं इस बार अभी तक 3 लाख,68 हजार,473 यात्री पहुंच चुके है। हेमकुंड साहिब में जहां 2009 में 2 लाख,77 हजार,86 लोग आए वहीं 9 अगस्त 2010 तक 2 लाख,35 हजार,948 तीर्थ यात्रियों की आमद दर्ज की गई है। जबकि ये यात्रा अभी नवंबर 2010 तक चलने वाली है। ये आकडे आगामी तस्वीर की स्थिति को स्पश्ट कर रहे है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न- चारधाम विकास परिशद का कोई ऐसा कार्य जो इस बार की यात्रा में विषेश माना जा सके।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूरतराम नौटियाल-वैसे तो विकास परिशद ने सरकार के सहयोग से कई कार्य ऐसे कराए हैं जो इस बार की यात्रा में चारचांद लगाते है और विषेश माने जा सकते है। लेकिन फिर भी इस बार की यात्रा में पॉलीथीन पर पूर्णतः प्रतिबंध जहां सरकार की एक उपलब्धि है। वहीं व्यवस्था के तौर पर सडक,षौचालय,सीसीटीवी कैमरे,चुस्त दुरूस्त सुरक्षा व्यवस्था,मोबाईल पर बात करते हुए या चप्पल पहन कर वाहन चलाने पर रोक जैसे व्यवस्थाएं इस बार यात्रा में सरकार और परिशद की परिश्रम और गंभीरता का परिचायक कही जा सकतीं हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रष्न-भविश्य में कोई अन्य योजना जिसका उल्लेख किया जा सके।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूरतराम नौटियाल- देखिए सरकार का एक मात्र लक्ष्य चारो धाम समेत पूरे प्रदेष के तीर्थ और पर्यटन स्थलों का संपूर्ण और सर्वांगीण विकास करना है। इससे जहां स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा वहीं बडी संख्या में पर्यटकों के आगमन से प्रदेष के राजस्व में भी बढोतरी होगी जिससे विकास के कृत संकल्पित सरकार का विजन 2020 सही मायनों में पूरा किया जा सकेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रस्तुति-धीरेन्द्र प्रताप सिंह  ब्यूरो प्रमुख हिन्दुस्थान समाचार उत्तराखंड&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-3645365127283184932?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/3645365127283184932/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=3645365127283184932' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/3645365127283184932'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/3645365127283184932'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2010/09/blog-post_27.html' title='साक्षात्कार ---चारधाम विकास परिषद्'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-1333261586595018685</id><published>2010-09-27T03:17:00.000-07:00</published><updated>2010-09-27T03:18:24.043-07:00</updated><title type='text'>विधानसभा में गूंजा पत्रकार उत्पीडन का मामला</title><content type='html'>उत्तराखंडः विधानसभा में गूंजा पत्र्ाकार उत्पीडन मामला&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देहरादून,२4 सितंबर। विधान सभा के मानसून सत्र्ा में गुरूवार को राज्य्ा में पत्र्ाकारों के उत्पीडन को लेकर जोरदार बहस हुई। कांग्रेस विधाय्ाक और सदन में नेता प्रतिपक्ष डा.हरकसिंह रावत ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि राज्य्ा में पत्र्ाकारों का उत्पीडन किय्ाा जा रहा है और छोटे पत्र्ा पत्र्ािकाओं पर सरकार के पक्ष में खबर लिखने का दबाव डाला जा रहा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उन्होंने एक पत्र्ाकार संगठन द्वारा विगत दिनों सूचना एवं लोकसंपर्क विभाग के सामने किए गए प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थिति विस्फोटक हो गई है और पत्र्ाकारों को अपनी बात कहने के लिए धरना प्रदर्शन का सहारा लेना पड रहा है। उन्होंने इस विषय्ा को निय्ाम-५८ के तहत उठाते हुए इसे लोक महत्व का बताय्ाा और विधानसभा अध्य्ाक्ष से इस पर अविलंब चर्चा करवाने की मांग की।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस मांग को विधानसभा अध्य्ाक्ष ने तुरंत स्वीकार कर लिय्ाा और इस पर चर्चा हुई। इसी मुद्दे को वीरोंखाल से कांग्रेस विधाय्ाक अमृता रावत ने भी उठाय्ाा और उन्होंने कहा कि क्य्ाा अब प्रदेश में छोटी पत्र्ा पत्र्ािकाओं के प्रतिनिधिय्ाों को कोई अधिकार नहीं दिय्ाा जाएगा। श्रीमती रावत ने कहा कि प्रदेश के एक जिला सूचनाधिकारी ने पिछले दिनों जिस तरह से छोटी पत्र्ापत्र्ािकाओं के संवाददाताओं के साथ बदसलूकी की वह निन्दनीय्ा है। उन्होंने सरकार पर वार करते हुए कहा कि सरकार सदन को इसका जवाब दे कि डीआईओं द्वारा ऐसा व्य्ावहार क्य्ाों किय्ाा गय्ाा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कांग्रेस नेताओं के आरोपों का सरकार की तरफ से उत्तर देते हुए संसदीय्ा कायर््ा मंत्र्ाी श्री प्रकाश पंत ने कहा कि कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनिय्ााद है। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को कम से कम सदन में सही बात को रखना चाहिए। उन्होंने एक पत्र्ाकार संगठन के धन्य्ावाद पत्र्ा का हवाला देते हुए कहा  िकइस संगठन ने अपनी ११ सूत्र्ाीय्ा मांगों को सरकार के सामने रखा था जिसपर सरकार ने त्वरित कायर््ावाई की और बाकी मांगों पर भी कार्रवाई प्रक्रिय्ााधीन है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उन्होंने पत्र्ाकारों के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे कल्य्ााणकारी कायर््ाो का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार ने पत्र्ाकार कल्य्ााण कोष की स्थापना की है। जिसमें अभी भी तीन करोड का फंड पडा है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में ५२६ मान्य्ाता प्राप्त पत्र्ाकार है जिन्हें राज्य्ा सरकार द्वारा तय्ा की गई सभी सुविधाएं दी जा रही है।&lt;br /&gt;श्री पंत ने कहा कि २॰॰९-१॰ में सरकार ने कुल १२ करोड रूपए के विज्ञापन जारी किए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि विज्ञापन देने में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किय्ाा गय्ाा है और जो जिस लाय्ाक था उसकों उतना विज्ञापन दिय्ाा गय्ाा। संसदीय्ा कायर््ा मंत्र्ाी श्री पंत कहा प्रदेश में हर नागरिक को संविधान के अनुच्छेद १९ के तहत अभिव्य्ाक्ति की पूरी स्वतंत्र्ाता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदेश के अधिकांश जिलों में प्रेस क्लब की स्थापना की है जहां पर पत्र्ाकारों के हितों को लेकर कायर््ा होता है।&lt;br /&gt;हालांकि सरकार के इस बय्ाान से कांग्रेस विधाय्ाक भडक गए। कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगाते हुए सदन से वाक आउट किय्ाा।  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt; इस बीच सदन में उस समय भी माहौल गंभीर हुआ जब सदन में ७॰ के दशक में पूर्व प्रधानमंत्र्ाी श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए   आपात की चर्चा संसदीय कार्यमंत्री प्रकाष पंत ने उठाई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मामला कांग्रेस द्वारा निय्ाम ५८ के तहत पत्र्ाकार उत्पीडन का मुद्दा उठाए जाने का है। कांग्रेस नेताओं ने जब सरकार पर प्रदेश के पत्र्ाकारों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए जवाब मांगा तो सरकार की तरफ से जवाब देते हुए संसदीय्ा कायर््ा मंत्र्ाी प्रकाश पंत ने कहा कि कांग्रेस के इस सवाल ने मुझ्ो ७॰ के दशक में देश में घोषित आपातकाल की य्ााद करा दी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि तत्कालीन केन्द्र्र सरकार ने देश के पत्र्ाकारों को सलाखों में ठूस दिय्ाा था और सभी समाचार पत्र्ाों की बिजली काट दी थी। उन्होंने कहा कि वास्तविक पत्र्ाकार उत्पीडन ऐसी घटनाओं को कहा जाता है। श्री पंत ने कहा कि उत्तराखंड सरकार पत्र्ाकारों के हितों के लिए सतत प्रय्ात्नशील है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उन्होंने कहा  िकइस समय्ा प्रदेश में ५॰ छोटे दैनिक अखबार,२१३ साप्ताहिक और १५ पाक्षिक समाचार पत्र्ाों के अलावा ७ पंजीकृत पत्र्ािकाएं भी है। इसके साथ ही प्रदेश में ३५ बडे दैनिक,३९१ बडे साप्ताहिक ९७ पाक्षिक समेत कुल ८१८ समाचार पत्र्ा पत्र्ािकाएं है। संसदीय्ा कार्य मंत्र्ाी ने कहा कि इन सभी पत्र्ा पत्र्ािकाओं को सरकार की तरफ से पूरा सहय्ाोग दिय्ाा जा रहा है। उनके इस उत्तर से विपक्ष ने असहमति जताते हुए सदन से वाक आउट किय्ाा। लेकिन इस चर्चा से प्रदेष के पत्रकारों में खुषी व्याप्त है। पत्रकारों का कहना है कि विधानसभा में पत्रकारों की समस्याओं पर इस गंभीर चर्चा से विपक्ष और सरकार की पत्रकारों को लेकर संवेदनषीलता दिखाई देती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-1333261586595018685?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/1333261586595018685/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=1333261586595018685' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/1333261586595018685'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/1333261586595018685'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='विधानसभा में गूंजा पत्रकार उत्पीडन का मामला'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-4731667190004718599</id><published>2010-09-27T03:09:00.000-07:00</published><updated>2010-09-27T03:10:25.151-07:00</updated><title type='text'>prakatik apada ne di uttrakhand ko chunouti</title><content type='html'>उत्तराखंड को मिली प्रकृति की चुनौती--पारूल सिंह&lt;br /&gt;उत्तराखंड भारत का सबसे सुन्दर और प्राकृतिक सौन्दर्य का बेमिशाल उदाहरण। देश को पर्यटन से सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला प्रदेश। सीमाओं की रक्षा करने के लिए खुशी खुशी अपने प्राणों की आहुति देने वालों का प्रदेश। देश को उर्जा,सिचाईं और पीने के लिए पानी देने वाला प्रदेश। आधा दर्जन हिमालयी राज्यों में विकास के मॉडल के तौर पर स्थापित प्रदेश और इन सबसे बढ़कर देश के सबसे युवा,साहित्यकार,पत्रकार और राजनेता डा. रमेश पोखरियाल निशंक के सपनों का प्रदेश आज प्राकृतिक आपदा के रूप में मिली प्रकृति की चुनौती से जूझता प्रदेश बन गया है। इस समय जितनी कड़ी परीक्षा से आपदा पीड़ित जनता को गुजरना पड़ रहा है उससे कही अधिक कठिन परीक्षा से निशंक सरकार को भी गुजरना पड़ रहा है। परंतु सरकार ने जिस तरह से राहतों और मदद के मोर्चो को संभाला है वह वाकई काबिले तारीफ है। सरकार की तत्परता को देखकर कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री ने रामचरित मानस के रचयिता तुलसीदास की उन पंक्तियों को गांठ बांध लिया है कि धीरज,धर्म,मित्र अरू नारी।। आपदकाल परखिए चारी।।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कहने का तात्पर्य यह कि मुख्यमंत्री ने जिस तरह से पूरे धैर्य के साथ इस चुनौती को स्वीकार किया है और प्रभावित दुर्गम क्षेत्रों में खुद पहुंच कर राहत सामग्रियों का वितरण करवा रहे है और आधी आधी रात तक प्रशासनिक अधिकारियों के साथ इससे निपटने की रणनीति बना रहे है वह शायद स्वार्थो के इस राजनीतिक युग में एक आदर्श और लोगों के लिए प्रेरणादायी हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विगत जनवरी से ही महाकुुंभ आयोजन में लगे मुख्यमंत्री ने जिस तरह से इसे विश्व का सबसे बड़ा और सफल आयोजन बनाया उसकी पूरी दुनिया ने तारीफ की। अभी सरकार में इस सफलता को लेकर जश्न की स्थिति बन ही रही थी कि उन्होंने चारधाम यात्रा को भी विश्व स्तर पर स्थापित करने का मास्टर प्लान बना लिया और उसे कुशलतापूर्वक क्रियान्वयन की ओर मोड़ा भी। लेकिन शायद प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था और विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर राज्य को ना जाने की किसकी नजर लगी कि यहां मानसूनी मौसम ने अपना कहर ढा दिया और इसकी चपेट में क्या मैदान क्या पहाड़ पूरा प्रदेश ही आ गया। इस आपदा से जनता और शासन प्रशासन के  लोग सकते में आ गए। लेकिन संकटों का सामना करने में प्रवीण मुख्यमंत्री ने मोर्चा संभाल लिया और ऐसी जगहों पर भी पहुंच कर शासन प्रशासन का हौंसला बढ़ाया जहां आम दिनों में भी जाना बड़ा कठिन कार्य है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खैर मुख्यमंत्री कोई भी हो उसका तो दायित्व ही है ऐसे कार्यो को करने का। लेकिन डा. पोखरियाल इस मामले में औरों से अलग है कि वे लीक पर चलकर ही कोई काम करे। सरकार के मुखिया ने इस आपदा से जूझते प्रदेष की जनता को इस बात का बखूबी एहसास कराया कि उनके दुख में वे पूरी तरह उनके साथ है। शायद इसका कारण उनके राजनीतिक जीवन की ऐसी शुरूआत से है जिसके चलते वे एक गरीब किसान के घर से प्रदेश की सर्वोच्च पंचायत तक का सफर किये। 1991 में जब उन्होंने कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेसी दिग्गज डा. शिवानन्द नौटियाल को धूल चटाकर विधानसभा पहुंचे होंगे तो शायद किसी को अंदाजा नहीं रहा होगा  िकइस विधानसभा से एक विधायक नहीं बल्कि भविष्य के उत्तराखंड का स्वप्नदृष्टा चुना गया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बात हो रही उत्तराखंड में आई हुई अब तक की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा की। यह सत्य है  िकइस प्राकृतिक आपदा ने विकास के रास्ते पर तेजी से गतिमान प्रदेश के विकास के पहिए को जाम कर दिया है। इस आपदा ने प्रदेश के विकास को कम से कम 10 साल पीछे ढकेल दिया है। लेकिन पूरे प्रदेश की जनता को यह पूरा विश्वास है कि महाकुंभ में प्रबंधन का इतिहास रचने वाली सरकार इस आपदा से निपटने में भी इतिहास को दोहराएगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस आपदा ने प्रदेश का जो नुकसान किया उससे तो पूरा देश अवगत है। लेकिन इस आपदा ने शायद सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया 2020 में उत्तराखंड को देश का सर्वोत्तम प्रदेश बनाने के मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निषंक के सपनों को। पिछले एक सालों में मुख्यमंत्री ने विजन-2020 को लेकर जिस तरह से पर्यटन,पर्यावरण संरक्षण,उर्जा,जड़ी बूटी,कुटीर उद्योग,बेहतर मानव संसाधन,गंगा स्वच्छता अभियान को लेकर योजनाएं बनाई उनका क्रियान्वय कराया उस पर इस आपदा ने पानी फेर दिया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री के सपनों को पूरा करने की है। लेकिन इन सब बातों के इतर मुख्यमंत्री की सक्रियता देखी जाए तो लगता है  िकइस आपदा ने मुख्यमंत्री के सपनों को तो जरूर प्रभावित किया है लेकिन उनके हौंसलों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। मुख्यमंत्री के प्रदेश भर के दौरों को देखकर लगता है कि आपदा से प्रदेश में मची तबाही ने मुख्यमंत्री के निश्चय को और दृढ किया है। चुनौतियों से निपटने में माहिर डा. निशंक ने जिस तरह से हवाई और सैकड़ों किमी पैदल यात्राएं कर पीड़ितों के आसूं पोछे है उससे लोगों के हौंसलों में जान आ गई है। उनकी मेहनत ने प्रदेश के शासन प्रशासन को तो ऐसे माहौल में कमर कसने के लिए प्रेरित किया ही है साथ ही प्रदेश के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक व स्वयंसेवी संस्थाओं को भी इस संकट से निपटने के उनके दायित्व की याद दिलाते हुए उन्हें इसके लिए प्रेरित किया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुख्यमंत्री के प्रयासों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आने वाला उत्तराखंड निश्चित ही अग्नि परीक्षा में तपकर निकला हुआ हीरा होगा और अन्य प्रदेशों के लिए अभिप्रेरणा का वायस।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पारूल सिंह-&lt;br /&gt;48/52,केशव रोड,लक्ष्मण चौक,देहरादून,उत्तराखंड&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-4731667190004718599?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/4731667190004718599/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=4731667190004718599' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/4731667190004718599'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/4731667190004718599'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2010/09/prakatik-apada-ne-di-uttrakhand-ko.html' title='prakatik apada ne di uttrakhand ko chunouti'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-4920586129878967634</id><published>2010-09-27T03:07:00.001-07:00</published><updated>2010-09-27T03:07:46.433-07:00</updated><title type='text'>bhasha ko le kar nishank sarakar ki gambheerata</title><content type='html'>भाषा और बोली को लेकर सदन में दिखी निशंक सरकार की  गंभीरता--धीरेन्द्र प्रताप सिंह&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उत्तराखंड को पूरे देश में देवभूमि होने का विशेष स्थान प्राप्त है। भारत के अधिकांश लोकप्रिय और श्रद्धा के केन्द्र तीर्थ स्थल इसी प्रदेश में है। वैसे तो यहां की सरकारें इन तीर्थस्थलों को लेकर शुरू से ही संवेदनीशील रही है। 10 वर्ष की आयु वाला यह प्रदेश कई राजनीतिक झंझावातों से समय समय पर जूझता रहा है और 10 साल में इसने पांच मुख्यमंत्री देखे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन इन झंझावातों के बीच प्रदेश विकास की ओर लगातार गतिमान रहा है। प्रदेश के पांचवें मुख्यमंत्री के तौर पर कार्य कर रहे भारत के युवा विनम्र मुख्यमंत्री के तौर पर अपने आप को स्थापित कर चुके डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने जिस तरह से प्रदेश में विकास की गति को बढ़ावा दिया है वह अन्य राज्यों के लिए नज़ीर बन गया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रसिद्ध लेखक,प्रखर राजनीतिज्ञ और इन सबसे बढ़कर मझे हुए पत्रकार के रूप में वैसे तो मुख्यमंत्री ने कई कीर्तिमान बनाएं है लेकिन यदि संक्षिप्त में मुख्यमंत्री के ऐसे कार्य को रेखांकित करने को कहा जाए जिससे वे इतिहास में अपना अलग स्थान बनाते है तो वह कार्य निश्चित ही मुख्यमंत्री द्वारा भाषाओं और बोलियों को लेकर किया जाने वाला कार्य है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कवि हृदय डा. पोखरियाल ने भाषाओं को लेकर जिस तरह की गंभीरता दिखाई है उससे अन्य राजनेता सीख ले सकते है। मुख्यमंत्री ने देवभूमि के रूप में स्थापित उत्तराखंड में देवभाषा संस्कृत को द्वितीय राजभाषा घोषित कर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के संस्कृत प्रेमियों का दिल जीत लिया। उनके इस कार्य से प्रसन्न लोगों ने जिस तरह से उनका पूरे देश में स्थान स्थान पर भव्य स्वागत और अभिनन्दन किया उससे संस्कृत को लेकर पूरे देश की भावना का पता चला।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हालांकि मुख्यमंत्री ने जिस तरह का साहित्य सृजन किया है वह अपने आप में ही उनकी साहित्यक गंभीरता का प्रमाण माना जा सकता है। लेकिन बीते मानसून सत्र में उन्होंने जिस तरह से उत्तराखंड की प्राचीन और लोकप्रिय बोलियों गढ़वाली,कुमाउनी और जौनसारी को शासकीय कार्य के लिए मान्यता प्राप्त करने का संकल्प प्रस्ताव पारित करवाया उसने मुख्यमंत्री की लोकप्रियता को चरम पर पहुंचा दिया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस प्रदेश में उपरोक्त तीनों बोलियों का संपन्न इतिहास है तो साथ ही इन्हें बोलने वालों की बड़ी संख्या भी। बहुत अर्से से इन तीनों भाषाओं में राजकीय और न्यायिक कार्यो को करने की मांग उठती रही है। लेकिन इन मांगों को बराबर अनसुना किया जाता रहा है। इन बोलियों की मान्यता को लेकर मुख्यमंत्री ने गंभीर चिंतन किया और अन्त में इसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकार के इस प्रस्ताव ने क्या पक्ष क्या विपक्ष सबको एक कर दिया पूरे सदन ने एकमत से इन बोलियों में शासकीय कार्य,अशासकीय और न्यायिक कार्य करने के संकल्प को ध्वनीमत से पारित कर दिया और इसे भारत की महामहिम राश्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल के पास अनुमोदन के लिए भेज दिया। अब अगर महामहिम ने सहमती दे दी तो उत्तराखंड के सरकारी कार्यालयों और न्यायालयों में इन भाषाओं को बोलने वाले इसका प्रयोग कर सकेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने सदन में यह प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव में गढ़वाली,कुमाउनी और जौनसारी बोलियों को ग्राम पंचायतों,क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों की बैठकों में भागीदारी करते समय लोगों को बोलने का अधिकार दिए जाने की बात शामिल है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्रों सरकारी अस्पतालों,राशन की दुकानों सर्व शिक्षा अभियान की बैठकों रोडवेज की बसों में टिकट लेने,मंडी परिषद में माल खरीदनें,बेचने के साथ ही सरकारी दफ्तरों में भी लोग इन बोलियों का धड़ल्ले से और आधिकारिक रूप से प्रयोग कर पाएंगे। इसके साथ ही इन बोलियों का प्रयोग निचली अदालतों में मौखिक रूप से अपना पक्ष रखने में भी किये जाने का प्रावधान होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विधानसभा में पारित इस संकल्प में राष्ट्रपति से अपेक्षा की गई है कि वे उत्तराखंड की इन बोलियों को संबंधित प्रयोजनों के लिए सरकारी मान्यता प्रदान करेंगी। इस प्रस्ताव के बारे में संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत का यह कथन कि इन बोलियों को मान्यता मिलने के बाद राज्य की बोलियों को तो बढ़ावा मिलेगा ही साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में लोग अपनी भावनाएं भी ज्यादा प्रभावी और स्पष्ट ढंग से व्यक्त कर सकेंगे। उनका यह कथन इन बोलियों की प्रासंगिकता और महत्व को स्पष्ट करता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ये तो हो गई सरकार की बोलियों को लेकर संवेदनशीलता। निशंक सरकार ने  कार्यभार संभालने के तुरंत बाद से जिस तरह से प्रदेश को हर मंच  पर अलग रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है उसका परिणाम आने वाले भविष्य में दिखेगा। प्रखर मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कुशल सरकार ने उत्तराखंड को भारत का भाल बनाने में दिनरात एक कर दिया जिसका परिणाम है कि करीब दर्जनभर हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड कई मामलों में नंबर वन गया है और यहां से अन्य राज्यों को अलग कार्य करने की प्रेरणा मिल रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महाकुंभ को सरकार ने कुशलता से संपन्न करवा कर उसे वैश्विक आयोजन बना डाला तो प्रदेश की देवभूिम के रूप में बनी पहचान को स्थापित करने के लिए हरिद्वार में जल्द ही एक विशेष संस्कृति विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की है। इतना ही नहीं हरिद्वार के धर्मक्षेत्रों में अन्य भाषाओं के साथ साथ सभी सरकारी गैर सरकारी संस्थाओं में संस्कृत भाषा में ही नाम और पदनाम पटिटकाएं लगाने का आदेश देकर इस भाषा को एक नया जीवन प्रदान किया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बहरहाल सरकार के ये कुछ ऐसे फैसलें है जिनका तुंरत परिणाम दिखने लगा है। लेकिन इसके अलावा भी सरकार ने प्रदेश हित में कई ऐसे फैसले लिए हैं जिनके चलते भविष्य में उत्तराखंड की सूरत बदलने वाली है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;धीरेन्द्र प्रताप सिंह ब्यूरो प्रमुख हिन्दुस्थान समाचार उत्तराखंड&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-4920586129878967634?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/4920586129878967634/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=4920586129878967634' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/4920586129878967634'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/4920586129878967634'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2010/09/bhasha-ko-le-kar-nishank-sarakar-ki.html' title='bhasha ko le kar nishank sarakar ki gambheerata'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-7657448654243112226</id><published>2009-07-07T12:08:00.000-07:00</published><updated>2009-07-07T12:09:54.183-07:00</updated><title type='text'>पूज्य डॉ मनोज मिश्रा जी के ब्लॉग से साभार</title><content type='html'>&lt;h3 class="post-title entry-title"&gt; &lt;a href="http://manjulmanoj.blogspot.com/2009/07/blog-post.html"&gt;एक अनुरोध .....&lt;/a&gt; &lt;/h3&gt;  &lt;div class="post-body entry-content"&gt; &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;यह&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;सितारों&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;भरी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;रात&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;फ़िर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;न&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;आज&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;है&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;वही&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;बात&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;फ़िर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;न&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;एक&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;पल&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;और&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;ठहरो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;तुम्हे&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;देख&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;लूँ&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;कौन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जाने&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मुलाकात&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;फ़िर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;न&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;span&gt;।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;  &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;गया&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;अकस्मात&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;फ़िर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;न&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हाथ&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;में&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;फूल&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;सा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हाथ&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;फ़िर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;न&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;तुम&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;रुको&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;इन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;क्षणों&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;की&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;खुशी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;चूम&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;लूँ&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;क्या&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;पता&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;इस&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;तरह&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;साथ&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;फ़िर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;न&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;span&gt;।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;तुम&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;रहो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;चांदनी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;  &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;का&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;महल&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;भी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;रहे&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;प्यार&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;की&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;यह&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;नशीली&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;गजल&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;भी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;रहे&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हाय&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;,&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;कोई&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;भरोसा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;नहीं&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;इस&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;तरह&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;आज&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;है&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;वही&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;बात&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;कल&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;भी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;रहे&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;span&gt;।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;चांदनी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मिल&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;गयी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;तो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;गगन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;भी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मिले&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;प्यार&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जिससे&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मिला&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;वह&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;नयन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;भी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मिले&lt;/span&gt; &lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;और&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जिससे&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मिली&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;खुशबुओं&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;की&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;लहर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;यह&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जरूरी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;नहीं&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;वह&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;सुमन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;भी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मिले&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;span&gt;।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जब&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;कभी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मुलाकात&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;  &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;से&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मिलें&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;रोशनी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;में&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;  &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;धुले&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;आचरण&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;से&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मिले&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;दो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;क्षणों&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;का&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मिलन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;भी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;बहुत&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;है&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;अगर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;लोग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;उन्मुक्त&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;अन्तः&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;करण&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;से&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मिले&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; ||&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: 85%;"&gt;(&lt;span&gt;रचना&lt;/span&gt;-&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 85%;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अवधी एवं हिन्दी के कालजयी&lt;br /&gt;लोक कवि स्व .पंडित रूपनारायण त्रिपाठी जी,&lt;br /&gt;जौनपुर )&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;  &lt;/div&gt; &lt;div class="post-footer"&gt; &lt;div class="post-footer-line post-footer-line-1"&gt;&lt;span class="post-author vcard"&gt; प्रस्तुतकर्ता &lt;span class="fn"&gt;डॉ. मनोज मिश्र&lt;/span&gt; &lt;/span&gt; &lt;span class="post-timestamp"&gt; पर &lt;a class="timestamp-link" href="http://manjulmanoj.blogspot.com/2009/07/blog-post.html" rel="bookmark" title="permanent link"&gt;&lt;abbr class="published" title="2009-07-07T04:37:00-07:00"&gt;4:37 AM&lt;/abbr&gt;&lt;/a&gt; &lt;/span&gt; &lt;span class="post-comment-link"&gt; &lt;a class="comment-link" href="http://manjulmanoj.blogspot.com/2009/07/blog-post.html#comments" onclick=""&gt;22 टिप्पणियाँ&lt;/a&gt; &lt;/span&gt; &lt;span class="post-icons"&gt; &lt;span class="item-control blog-admin pid-1977714168"&gt; &lt;a href="post-edit.g?blogID=7498896836438070792&amp;amp;postID=5593832598200198976" title="संदेश का संपादन करें"&gt; &lt;img alt="" class="icon-action" src="img/icon18_edit_allbkg.gif" width="18" height="18" /&gt; &lt;/a&gt; &lt;/span&gt; &lt;/span&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="post-footer-line post-footer-line-2"&gt;&lt;span class="post-labels"&gt; &lt;/span&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="post-footer-line post-footer-line-3"&gt;&lt;span class="post-location"&gt; &lt;/span&gt; &lt;/div&gt; &lt;/div&gt;  &lt;h2 class="date-header"&gt;Sunday, June 28, 2009&lt;/h2&gt; &lt;div class="post hentry"&gt; &lt;a name="9058912536812161922"&gt;&lt;/a&gt; &lt;h3 class="post-title entry-title"&gt; &lt;a href="http://manjulmanoj.blogspot.com/2009/06/blog-post_28.html"&gt;एक पसंदीदा गजल ...&lt;/a&gt; &lt;/h3&gt;  &lt;div class="post-body entry-content"&gt; &lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;खूबसूरत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इरादों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;वो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पतझडों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गुलाबों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ऐसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दौर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नींद&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बहुत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मुश्किल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;अजीब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शख्स&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ख्वाबों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;उछाल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करके&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुछ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मासूम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सवालों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;वो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पत्थरों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जबाबों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;वो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चाहता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अंगूठे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बचे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहें&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सबके&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;वो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कापियों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;किताबों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चिंगारी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;छिपाए&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अपने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सीने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;वो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बार&lt;/span&gt; -&lt;span&gt;बार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मशालों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; .&lt;/span&gt;     &lt;br /&gt;रचना -डॉ वशिष्ठ अनूप .  &lt;/div&gt; &lt;div class="post-footer"&gt; &lt;div class="post-footer-line post-footer-line-1"&gt;&lt;span class="post-author vcard"&gt; प्रस्तुतकर्ता &lt;span class="fn"&gt;डॉ. मनोज मिश्र&lt;/span&gt; &lt;/span&gt; &lt;span class="post-timestamp"&gt; पर &lt;a class="timestamp-link" href="http://manjulmanoj.blogspot.com/2009/06/blog-post_28.html" rel="bookmark" title="permanent link"&gt;&lt;abbr class="published" title="2009-06-28T17:11:00-07:00"&gt;5:11 PM&lt;/abbr&gt;&lt;/a&gt; &lt;/span&gt; &lt;span class="post-comment-link"&gt; &lt;a class="comment-link" href="http://manjulmanoj.blogspot.com/2009/06/blog-post_28.html#comments" onclick=""&gt;48 टिप्पणियाँ&lt;/a&gt; &lt;/span&gt; &lt;span class="post-icons"&gt; &lt;span class="item-control blog-admin pid-1977714168"&gt; &lt;a href="post-edit.g?blogID=7498896836438070792&amp;amp;postID=9058912536812161922" title="संदेश का संपादन करें"&gt; &lt;img alt="" class="icon-action" src="img/icon18_edit_allbkg.gif" width="18" height="18" /&gt; &lt;/a&gt; &lt;/span&gt; &lt;/span&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="post-footer-line post-footer-line-2"&gt;&lt;span class="post-labels"&gt; &lt;/span&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="post-footer-line post-footer-line-3"&gt;&lt;span class="post-location"&gt; &lt;/span&gt; &lt;/div&gt; &lt;/div&gt; &lt;/div&gt; &lt;h2 class="date-header"&gt;Tuesday, June 16, 2009&lt;/h2&gt;  &lt;a name="8865867040091552524"&gt;&lt;/a&gt; &lt;h3 class="post-title entry-title"&gt; &lt;a href="http://manjulmanoj.blogspot.com/2009/06/blog-post_16.html"&gt;एक पल ही जियो ...&lt;/a&gt; &lt;/h3&gt;   &lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;एक&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;पल&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;ही&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जियो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; ,&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;फूल&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;बन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;कर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जियो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; ,&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;शूल&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;बन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;कर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;ठहरना&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;नहीं&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जिन्दगी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; ||&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;         &lt;span style="font-size: 130%;"&gt;अर्चना&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;की&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;सजोये&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;हुए&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;अंजली&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; ,&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;          &lt;span style="font-size: 130%;"&gt;तुम&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;किसी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;देवता&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;से&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;मिलो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;तो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;सही&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; |&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;          &lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जिन्दगी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;की&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;यहाँ&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;अनगिनत&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;डालियाँ&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; ,&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;           &lt;span style="font-size: 130%;"&gt;तुम&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;किसी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;पर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;सुमन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;बन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;खिलो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;तो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;सही&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; ||&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;एक&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;पल&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;ही&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जियो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; ,&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;तुम&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;सुरभि&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;बन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जियो&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; ,&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;धूल&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;बन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;कर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;उमड़ना&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;नहीं&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;जिन्दगी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt; ||&lt;br /&gt;तम -भरी वीथीयों के अधूरे सपन ,&lt;br /&gt;कुमकुमी बांसुरी पर बजाते चलो |&lt;br /&gt;रात रोये हुए फूल की आँख में ,&lt;br /&gt;ज्योति की नव किरण तुम सजाते चलो ||&lt;br /&gt;एक पल ही जियो प्रात बन कर जियों ,&lt;br /&gt;रात बन कर उतरना नहीं जिन्दगी |&lt;br /&gt;चेतना के किसी भी क्षितिज से उठो ,&lt;br /&gt;याचना के नयन -कोर परसा करो |&lt;br /&gt;जिस लहर पर उड़ो,जिस डगर पर बहो ,&lt;br /&gt;कामना की सुधा -बूँद बरसा करो ||&lt;br /&gt;एक पल ही जियो ,तुम जलद बन जियो ,&lt;br /&gt;वज्र बन कर घहरना नहीं जिन्दगी |&lt;br /&gt;वेदना की लहर में डुबोये न जो ,&lt;br /&gt;धार में डूबते को किनारा बने ,&lt;br /&gt;शोक जब श्लोक की पूनमी छावं में ,&lt;br /&gt;पंथ -हारे हुए को किनारा बने ||&lt;br /&gt;एक पल ही जियो ,गीत बन कर जियो ,&lt;br /&gt;अश्रु बनकर बिखरना नहीं जिन्दगी |&lt;br /&gt;काल के हाथ पर भाव की आरती ,&lt;br /&gt;बन सदा स्नेह से लौ लगाते चलो ,&lt;br /&gt;देह को ज्योति-मन्दिर बनाते चलो ,&lt;br /&gt;साँस की हर लहर जगमगाते चलो ||&lt;br /&gt;एक पल ही जियो ,दीप बन कर जियो ,&lt;br /&gt;धूम बन कर घुमड़ना   नहीं जिन्दगी |&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;(&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;जौनपुर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;के&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;प्रख्यात&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;कवि&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; " &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;साहित्य &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;वाचस्पति&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; " &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;श्री&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;पाल&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;सिंह&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; "      &lt;/span&gt; &lt;span style="font-size: 100%;"&gt;क्षेम&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; "  &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;के&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;  &lt;span&gt;द्वारा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिखी&lt;/span&gt;  गयी &lt;span&gt;यह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रचना&lt;/span&gt;   &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;१९५५&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;से&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;१९६७&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;के&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;बीच&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;कभी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;span&gt;सृजित&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गयी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;थी&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;.इसकी लोकप्रियता का  &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;आलम यह है कि &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;तत्कालीन&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;  दौर में  तथा आज भी  &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;कविसम्मेलनों&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;में&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;श्रोताओं&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;की&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;सबसे&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;पसंदीदा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;रचना&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;हुआ&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;करती&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;  &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;&lt;span&gt;है&lt;/span&gt;  &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 100%;"&gt;।)--&lt;br /&gt;प्रस्तुति--धीरेन्द्र प्रताप सिंह दुर्ग्वंशी&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-7657448654243112226?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/7657448654243112226/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=7657448654243112226' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/7657448654243112226'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/7657448654243112226'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2009/07/blog-post.html' title='पूज्य डॉ मनोज मिश्रा जी के ब्लॉग से साभार'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-8078542627364050348</id><published>2009-05-25T11:53:00.000-07:00</published><updated>2009-05-25T11:54:43.496-07:00</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;भले डांट घर में तू बीबी की खाना&lt;br /&gt;भले जैसे -तैसे गिरस्ती   चलाना&lt;br /&gt;भले जा के जंगल में धूनी रमाना&lt;br /&gt;मगर मेरे बेटे कचहरी न जाना&lt;br /&gt;कचहरी न जाना- कचहरी न जाना.&lt;br /&gt;कचहरी हमारी तुम्हारी नहीं है&lt;br /&gt;कहीं से कोई रिश्तेदारी नहीं है&lt;br /&gt;अहलमद से भी कोरी  यारी नहीं है&lt;br /&gt;तिवारी था पहले तिवारी नहीं है&lt;br /&gt;कचहरी की महिमा निराली है बेटे&lt;br /&gt;कचहरी वकीलों की थाली है बेटे&lt;br /&gt;पुलिस के लिए छोटी साली है बेटे&lt;br /&gt;यहाँ पैरवी अब दलाली है बेटे&lt;br /&gt;कचहरी ही गुंडों की खेती है बेटे&lt;br /&gt;यही जिन्दगी उनको देती है बेटे&lt;br /&gt;खुले आम कातिल यहाँ घूमते हैं&lt;br /&gt;सिपाही दरोगा चरण चुमतें  है&lt;br /&gt;कचहरी में सच की बड़ी दुर्दशा है&lt;br /&gt;भला आदमी किस तरह से फंसा है&lt;br /&gt;यहाँ झूठ की ही कमाई है बेटे&lt;br /&gt;यहाँ झूठ का रेट हाई है बेटे&lt;br /&gt;कचहरी का मारा कचहरी में भागे&lt;br /&gt;कचहरी में सोये कचहरी में जागे है&lt;br /&gt;मर जी रहा है गवाही में ऐसे&lt;br /&gt;है तांबे का हंडा सुराही में जैसे&lt;br /&gt;लगाते-बुझाते सिखाते मिलेंगे&lt;br /&gt;हथेली पे सरसों उगाते मिलेंगे&lt;br /&gt;कचहरी तो बेवा का तन देखती है&lt;br /&gt;कहाँ से खुलेगा बटन देखती है&lt;br /&gt;कचहरी शरीफों की खातिर नहीं है&lt;br /&gt;उसी की कसम लो जो हाज़िर नहीं है&lt;br /&gt;है बासी मुहं घर से बुलाती कचहरी&lt;br /&gt;बुलाकर के दिन भर रुलाती कचहरी&lt;br /&gt;मुकदमें की फाइल दबाती कचहरी&lt;br /&gt;हमेशा नया  गुल खिलाती कचहरी&lt;br /&gt;कचहरी का पानी जहर से भरा है&lt;br /&gt;कचहरी के नल पर मुवक्किल मरा है&lt;br /&gt;मुकदमा बहुत पैसा खाता है बेटे&lt;br /&gt;मेरे जैसा कैसे निभाता है बेटे&lt;br /&gt;दलालों नें घेरा सुझाया -बुझाया&lt;br /&gt;वकीलों नें हाकिम से सटकर दिखाया&lt;br /&gt;धनुष हो गया हूँ मैं टूटा नहीं हूँ&lt;br /&gt;मैं मुट्ठी हूँ केवल अंगूंठा नहीं हूँ&lt;br /&gt;नहीं कर सका मैं मुकदमें का सौदा&lt;br /&gt;जहाँ था करौदा वहीं है करौदा&lt;br /&gt;कचहरी का पानी कचहरी का दाना&lt;br /&gt;तुम्हे लग न जाये तू बचना बचाना&lt;br /&gt;भले और कोई मुसीबत बुलाना&lt;br /&gt;कचहरी की नौबत कभी घर न लाना&lt;br /&gt;कभी भूल कर भी न आँखें उठाना&lt;br /&gt;न आँखें उठाना न गर्दन फसाना&lt;br /&gt;जहाँ पांडवों को नरक है कचहरी&lt;br /&gt;वहीं कौरवों को सरग है कचहरी ||&lt;br /&gt;आदरणीय मनोज मिश्रा जी के ब्लॉग से साभार&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-8078542627364050348?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/8078542627364050348/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=8078542627364050348' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/8078542627364050348'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/8078542627364050348'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2009/05/blog-post.html' title=''/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-4014237773206458021</id><published>2009-04-21T14:17:00.003-07:00</published><updated>2009-04-21T14:23:51.275-07:00</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;h3 class="post-title entry-title"&gt; &lt;a href="http://manjulmanoj.blogspot.com/2008/11/blog-post_24.html"&gt;कुछ मुक्तकें राजनीतिक आयाम पर&lt;/a&gt; &lt;/h3&gt;   &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;    &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;याचनाओं का यन्त्र लगता है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कामनाओं का मंत्र लगता है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;तेरा वह राजतन्त्र का चेहरा &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;इन दिनों लोकतंत्र लगता है |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;राजनीतिक भंवर में रहतें हैं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;देखता हूँ अधर में रहतें हैं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;  एक दिन जो गगन में उड़ते थे &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अब किराये के घर में रहते हैं |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जगमगाए महानगर लेकिन &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;गाँव घर की अजीब सूरत है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;टिम टिमाते हुए चिरान्गों पर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आज भी रात की हुकूमत है |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;चैन दूभर है क्या किया जाए &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;हल बदतर है क्या किया जाए &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;  राजधानी में उनके कंधों पर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;उनका बिस्तर है क्या किया जाए |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;रात दिन जो तिजोरियां अपनी &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आदमी के लहू से भरतें हैं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;देवता उनकी वन्दनाओं को &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जाने कैसे कबूल करतें हैं |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;देखता हूँ मै जो अंधेरे में &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;लूट का इंतजाम करता है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;  फूल लेकर वही उजाले में &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;देवता को प्रणाम करता है |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;       और अन्तत :-&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;लोक संगीत का रवानी हूँ &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;रमता जोगी हूँ बहता पानी हूँ &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;तुमको सत्ता का रथ मुबारक हो &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;मैं तो पगडंडियों   का प्राणी हूँ | &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आज कल चुनावों के मौसम में इस सटीक रचना को मेरे साहित्यिक गुरु ,अवधी एवं हिन्दी के कालजयी लोक कवि स्व .रूपनारायण त्रिपाठी जी ने लिखा है जो आज भी कहीं न कहीं यथार्थ का बोध करातीं हैं उनके द्वारा जीवन के विविध रंगों पर लिखी गयी रचनाओं को ,समय -समय पर ब्लॉग के मित्रों के लिए मै प्रस्तुत करता रहूँगा .उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मालिक मुहम्मद जायसी पुरस्कार से सम्मानित स्व .त्रिपाठी जी अस्सी के दशक तक रास्ट्रीय स्तर पर होने वाले कवि सम्मेलनों में श्रोताओं की सर्वाधिक पसंद वाले कवि हुआ करते थे .&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-4014237773206458021?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/4014237773206458021/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=4014237773206458021' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/4014237773206458021'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/4014237773206458021'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2009/04/blog-post_6438.html' title=''/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-8973749120730817571</id><published>2009-04-21T14:17:00.002-07:00</published><updated>2009-04-21T14:22:08.373-07:00</updated><title type='text'>परम पूज्य गुरु जी डॉ. मनोज मिश्रा जी के ब्लॉग से साभार</title><content type='html'>&lt;h3 class="post-title entry-title"&gt; &lt;a href="http://manjulmanoj.blogspot.com/2008/11/blog-post_24.html"&gt;कुछ मुक्तकें राजनीतिक आयाम पर&lt;/a&gt; &lt;/h3&gt;   &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;    &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;याचनाओं का यन्त्र लगता है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कामनाओं का मंत्र लगता है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;तेरा वह राजतन्त्र का चेहरा &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;इन दिनों लोकतंत्र लगता है |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;राजनीतिक भंवर में रहतें हैं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;देखता हूँ अधर में रहतें हैं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;  एक दिन जो गगन में उड़ते थे &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अब किराये के घर में रहते हैं |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जगमगाए महानगर लेकिन &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;गाँव घर की अजीब सूरत है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;टिम टिमाते हुए चिरान्गों पर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आज भी रात की हुकूमत है |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;चैन दूभर है क्या किया जाए &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;हल बदतर है क्या किया जाए &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;  राजधानी में उनके कंधों पर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;उनका बिस्तर है क्या किया जाए |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;रात दिन जो तिजोरियां अपनी &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आदमी के लहू से भरतें हैं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;देवता उनकी वन्दनाओं को &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जाने कैसे कबूल करतें हैं |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;देखता हूँ मै जो अंधेरे में &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;लूट का इंतजाम करता है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;  फूल लेकर वही उजाले में &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;देवता को प्रणाम करता है |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;       और अन्तत :-&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;लोक संगीत का रवानी हूँ &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;रमता जोगी हूँ बहता पानी हूँ &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;तुमको सत्ता का रथ मुबारक हो &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;मैं तो पगडंडियों   का प्राणी हूँ | &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आज कल चुनावों के मौसम में इस सटीक रचना को मेरे साहित्यिक गुरु ,अवधी एवं हिन्दी के कालजयी लोक कवि स्व ।रूपनारायण त्रिपाठी जी ने लिखा है जो आज भी कहीं न कहीं यथार्थ का बोध करातीं हैं उनके द्वारा जीवन के विविध रंगों पर लिखी गयी रचनाओं को ,समय -समय पर ब्लॉग के मित्रों के लिए मै प्रस्तुत करता रहूँगा .उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मालिक मुहम्मद जायसी पुरस्कार से सम्मानित स्व .त्रिपाठी जी अस्सी के दशक तक रास्ट्रीय स्तर पर होने वाले कवि सम्मेलनों में श्रोताओं की सर्वाधिक पसंद वाले कवि हुआ करते थे .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-8973749120730817571?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/8973749120730817571/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=8973749120730817571' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/8973749120730817571'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/8973749120730817571'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2009/04/blog-post_3999.html' title='परम पूज्य गुरु जी डॉ. मनोज मिश्रा जी के ब्लॉग से साभार'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-468170893355828014</id><published>2009-04-21T14:17:00.001-07:00</published><updated>2009-04-21T14:20:26.031-07:00</updated><title type='text'>आदरणीय डॉ. मनोज मिश्रा जी के ब्लॉग से साभार</title><content type='html'>&lt;h3 class="post-title entry-title"&gt; &lt;a href="http://manjulmanoj.blogspot.com/2008/11/blog-post_24.html"&gt;कुछ मुक्तकें राजनीतिक आयाम पर&lt;/a&gt; &lt;/h3&gt;   &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;    &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;याचनाओं का यन्त्र लगता है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कामनाओं का मंत्र लगता है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;तेरा वह राजतन्त्र का चेहरा &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;इन दिनों लोकतंत्र लगता है |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;राजनीतिक भंवर में रहतें हैं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;देखता हूँ अधर में रहतें हैं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;  एक दिन जो गगन में उड़ते थे &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अब किराये के घर में रहते हैं |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जगमगाए महानगर लेकिन &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;गाँव घर की अजीब सूरत है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;टिम टिमाते हुए चिरान्गों पर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आज भी रात की हुकूमत है |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;चैन दूभर है क्या किया जाए &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;हल बदतर है क्या किया जाए &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;  राजधानी में उनके कंधों पर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;उनका बिस्तर है क्या किया जाए |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;रात दिन जो तिजोरियां अपनी &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आदमी के लहू से भरतें हैं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;देवता उनकी वन्दनाओं को &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जाने कैसे कबूल करतें हैं |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;देखता हूँ मै जो अंधेरे में &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;लूट का इंतजाम करता है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;  फूल लेकर वही उजाले में &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;देवता को प्रणाम करता है |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;       और अन्तत :-&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;लोक संगीत का रवानी हूँ &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;रमता जोगी हूँ बहता पानी हूँ &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;तुमको सत्ता का रथ मुबारक हो &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;मैं तो पगडंडियों   का प्राणी हूँ | &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आज कल चुनावों के मौसम में इस सटीक रचना को मेरे साहित्यिक गुरु ,अवधी एवं हिन्दी के कालजयी लोक कवि स्व ।रूपनारायण त्रिपाठी जी ने लिखा है जो आज भी कहीं न कहीं यथार्थ का बोध करातीं हैं उनके द्वारा जीवन के विविध रंगों पर लिखी गयी रचनाओं को ,समय -समय पर ब्लॉग के मित्रों के लिए मै प्रस्तुत करता रहूँगा .उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मालिक मुहम्मद जायसी पुरस्कार से सम्मानित स्व .त्रिपाठी जी अस्सी के दशक तक रास्ट्रीय स्तर पर होने वाले कवि सम्मेलनों में श्रोताओं की सर्वाधिक पसंद वाले कवि हुआ करते थे .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-468170893355828014?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/468170893355828014/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=468170893355828014' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/468170893355828014'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/468170893355828014'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2009/04/blog-post_21.html' title='आदरणीय डॉ. मनोज मिश्रा जी के ब्लॉग से साभार'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-1017454482635850780</id><published>2009-04-21T14:17:00.000-07:00</published><updated>2009-04-21T14:19:01.815-07:00</updated><title type='text'>आदरणीय डॉ.मनोज मिश्रा जी के ब्लॉग से साभार</title><content type='html'>&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;नीर  ही जब नमी से डरता हो &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;प्यार अपनी  कमी से डरता हो ,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जिन्दगी कैसे मुस्कराए जब &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आदमी ही आदमी से डरता हो |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;पाप चलता है बन्दगी की तरह &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आग चलती है चांदनी की तरह ,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;हाय रे आज कल अँधेरा भी &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; बात करता है रोशनी की तरह |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;गीत मिलती है बीन मिलती है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जिंदगी भी  हसीन मिलती है, &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अंत में हर किसी को मुश्किल से &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;सिर्फ़ दो गज जमीन मिलती है |&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;एक रंगीन गम सफर के लिए &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;लाख मायूसियाँ  नजर के लिए ,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; एक मुस्कान चंद लमहों की &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;दे गयी दर्द उम्र भर के लिए | &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आँख नम हैं तो क्या हुआ आख़िर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;मेरे आंसू तो मुस्कराते हैं ,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;गीत मेरे चिराग में जलके &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आँधियों में भी जगमगाते हैं | &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;(स्व.पंडित रूप नारायण त्रिपाठी )&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-1017454482635850780?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/1017454482635850780/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=1017454482635850780' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/1017454482635850780'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/1017454482635850780'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2009/04/blog-post.html' title='आदरणीय डॉ.मनोज मिश्रा जी के ब्लॉग से साभार'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-1083859373582406944</id><published>2008-10-10T05:10:00.003-07:00</published><updated>2008-10-10T05:29:01.355-07:00</updated><title type='text'>वायस  ऑफ़ इंडिया-मीडिया की डूबती आवाज--dheerendra प्रताप singh</title><content type='html'>वैसा ऑफ़ इंडिया को लांच करवाने वाले देश के बड़े पत्रकार राम कृपाल ने जब छडा था तभी मीडिया के विस्लेसको ने अंदाजा लगा लिया था की देर सबेर इस चिनल का यही अंजाम होने वाला है /इसके मालिक जो की बड़े बिल्डर है उन्होंने इसे भी रियल इस्टेट की तरह चला रहे है /उन्हें यह जान लेना चाहिए की मीडिया और रियल इस्टेट में बहूत फर्क है /खैर हमारे जो सीनियर पत्रकार पैसे और पड़ की लालच में अपने सम्मानित स्थान को छोड़ कर गए थे उनके लिए यह सबक है की हर चमकती चीज सोना नही होती /मैंने तो यहाँ तक सुना है की उस मीडिया हाउस में यह नियम बना दिया गया है की हेर रिपोर्टर १ लाख  लाये और उसमे से १० हजार अपनी सेलरी ले जाए /इतना ही नही मीडिया जगत में यह चर्चा भी जोरो में है की चैनल मालिको ने रिपोर्टरों पर यह दबाव बनाया है की आने वाले विधानसभा चुनावों में वो लोग चैनल की लगत को वसूअलने की योजना पर कम करे /खैर जो चैनल या संस्था अपने जन्मदाता को ही होश सँभालते ही लत मार दे उसके किसी भी अंजाम को प्रत्यासित ही मन जाता है /रामकृपाल जी तो अपने पूर्व घर नव भारत टाईम्स में फिर वापस आ गए है और उन्हें संसथान ने इज्जत भी बक्षी है /उन्हें हमारी शुभ कम्नाये /लेकिन उनको अपने ड्रीम प्रोजेक्ट की इस हालत पर रोना जरूर आ रहा होगा /धीरेन्द्र प्रताप सिंह&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-1083859373582406944?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/1083859373582406944/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=1083859373582406944' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/1083859373582406944'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/1083859373582406944'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2008/10/dheerendra-singh.html' title='वायस  ऑफ़ इंडिया-मीडिया की डूबती आवाज--dheerendra प्रताप singh'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-4831194393834950436</id><published>2008-10-10T00:37:00.000-07:00</published><updated>2008-10-10T00:52:09.103-07:00</updated><title type='text'>लाइव इन रिलेताशन्शिप महाराष्ट्र सरकार के  मानसिक दिवालियापन का परिचायक--धीरेन्द्र प्रताप सिंह</title><content type='html'>महाराष्ट्र सरकार का लाइव इन रिलेसंसिप को कानूनी मान्यता देने का निर्णय उनकी मानसिक दिवालियेपन का परिचायक तो है ही साथ ही भारत के प्राचीन और महान संस्था विवाह को कमजोर करने का खाद्यंत्र भी है /हालाँकि उनकी ये साजिश सफल नही होगी क्योकि कल ही मुंबई के कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व गृहराज्य मंत्री कृपा शंकर सिंह ने अक टीवी चैनल पर इसे बेकार बताते हुए इसके विरोध की बात कही है /इसके लिए उन्हें धन्यवाद /श्री सिंह पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से है जो विश्प्रसिध कशी के पास है इसलिए लाइव इन रिलेसनशिप का विरोध करके उन्होंने सिद्ध भी कर दिया है की उन्होंने अभी तक अपने अन्दर के जौनपुरिया को राजनीति की बलि नही चड़ने दिया है /बहरहाल कृपा जी आप बुराइयों के विरोध के मैदान में ऐसे ही मजबूती से जामे रहे /आप के साथ करोडो लोगो की सद्भावानाये है /आपको अपने कार्यो के लिए याद किया जाएगा&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-4831194393834950436?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/4831194393834950436/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=4831194393834950436' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/4831194393834950436'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/4831194393834950436'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2008/10/blog-post_10.html' title='लाइव इन रिलेताशन्शिप महाराष्ट्र सरकार के  मानसिक दिवालियापन का परिचायक--धीरेन्द्र प्रताप सिंह'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-825152761086401380</id><published>2008-10-09T00:47:00.000-07:00</published><updated>2008-10-09T01:36:25.352-07:00</updated><title type='text'>स्वामी लक्ष्मणानंद--व्यर्थ न होगा यह बलिदान--धीरेन्द्र प्रताप सिंह</title><content type='html'>कंधमाल के बनवासी समाज में पिछले कई दशको से उनके साथ हो रहे दुर्व्यवहार और राजनैतिक --सामाजिक उपेक्षा को ले कर जो लावा भीतर भीतर सुलग रहा था वह अब बहार आ गया है /स्वामी लक्ष्मणानंद की नृशंस हत्या के बाद उस  पूरे क्षेत्र में कोई ऐसी शक्ति नही है जो क्रोधित बनवासी समाज को रोक सके /&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;स्वामी लक्ष्मणानंद यद्यपि हिंदू परम्परा के सन्यासी थे किंतु वे उनके बीच उनके जैसे हो कर रहे /उन्होंने अपना जीवन कंधमाल के बनबासी समाज के उठान के लिए समर्पित कर दिया  परिणामस्वरूप उस समाज का अगाध विश्वास प्राप्त किया /वह भारत के अन्य महान संतो की तरह ही इक बड़े समाजसुधारक थे जिन्होंने ने बनबासी समाज को स्वावलंबी बनने की प्रेरणा दी तथा स्वाभिमान से जीना सिखाया /&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;स्वामी लक्ष्मणानंद ने पूरे क्षेत्र में अत्यधिक सम्मान अर्जित किया था /बनबासी तो उन्हें भगवान् की तरह पूजते थे /कंधमाल के विकास के लिए उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल क्र अनेक उदार लोगो से सहयोग ले कर विकाश योजनाये शुरू की थी /छत्रावासो में सैकडो विद्याराथियो के रहने व्  खाने की निःशुल्क व्यवस्था के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने के लिए याचक की भाति हेर किसी से सहयोग मांगते थे /किंतु बनबासी समाज के लिए इतना कुछ करने के बाद भी स्वयं वे उसी फूस की झोपडी में आज भी रहते थे जो उन्होंने ४० वर्ष पहले बनाई थी /&lt;br /&gt;इतना ही नही वे बनबासी समाज के प्रवक्ता भी  थे /महानगरो में बैठे लोगों के लिए यह आश्चर्य का विषय हो सकता है किंतु यह सत्य है आज भी उस क्षेत्र में अंग्रेजी या हिन्दी ही नही उड़िया बोलने वाले लोग भी कम ही है /वे अपनी  स्थानीय भासा कुई बोलते है /इन लोगो का जब भी कभी सरकारी मामलो से सामना होता था तो स्वामी जी उनकी वाणी बनते थे /थाने कचहरी अथवा पटवारी के खाते खातुइनी में बनवासियों के साथ अन्याय न हो  इसलिए स्वामी जी सदा उनके साथ रहते थे /&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वर्त्तमान काल में जहाँ लाभ और लोभ सदगुण जैसी प्रतिष्ठा पा चुके है  राजनैतिक स्वार्थ जहाँ निति नियंताओं की प्राथमिकता है ऐसे में कोई लक्ष्मणानंद जब सब कुछ त्याग कर बनवासियों के साथ  उनके उत्थान में अपना जीवन खपा देता है तो बदले में उसे मिलती है ८४ वर्ष की आयु में न्रिसंस मौत /होती है उसकी हत्या पर निक्रिस्ट राजनीति /लगाये जाते है उस पर लांछन /और जब वे बनबासी  जिनके लिए स्वामी जी ने अपना जीवन लगाया  क्रोध में उबल  पड़ते है तो उन्हें सम्प्रदायिका कहा जाता है /कितने दिन तक चलेगा यह सब /&lt;br /&gt;परिवर्तन के जिस चक्र को स्वामी जी ने गति दी थी उसे आगे बढ़ाना ही या उसका संकल्प  लेना ही उनके प्रति सच्ची स्राधांजलि होगी /स्वामी जी कहते ठ--रहे  --धीरेन्द्र प्रताप सिंह जौनपुर  मातृभूमि के लिए कार्य करने का संकल्प ग्रहण किया  है  तो मृत्यु से कभी मत दरो /उन्होंने बलिदान दे कर अपना वचन पूरा किया     अब हमारी बारी है /हमें स्वामी जी की दिवंगत आत्मा को यह विशवास दिलाना होगा की उनका बलिदान व्यर्थ नही जाएगा /उनका संदेश ले कर इक नया भारत खड़ा होगा जो समूचे विश्व को आलूक से भर देगा --स्वामी जी अमर&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-825152761086401380?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/825152761086401380/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=825152761086401380' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/825152761086401380'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/825152761086401380'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2008/10/blog-post_09.html' title='स्वामी लक्ष्मणानंद--व्यर्थ न होगा यह बलिदान--धीरेन्द्र प्रताप सिंह'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-5999703979415668206</id><published>2008-10-08T07:43:00.000-07:00</published><updated>2008-10-08T07:44:21.202-07:00</updated><title type='text'>स्वामी चिन्मयानंद-राष्ट्रवाद का चितेरा संत राजनेता--धीरेन्द्र प्रताप सिंह</title><content type='html'>&lt;a name="7568672016177341265"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://bhadas.blogspot.com/2008/10/blog-post_9268.html"&gt;स्वामी चिन्मयानंद-राष्ट्रवाद का चितेरा संत राजनेता--धीरेन्द्र प्रताप सिंह&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;स्वामी चिन्मयानंद भाजपा के वरिस्ट नेता पूर्व केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री और इससे भी बढ़ कर भारत की पुरातन संस्कृति के प्रतीक संत /सदैव राष्ट्रवादी विचारो के लिए प्राणप्रण से लड़ने वाले संत राजनेता /राम मन्दिर मुद्दे पर हिंदू समाज के साथ न्याय की मांग ले कर सड़क से संसद तक संघर्सः करने वाले सवामी जी इस समय अपने ही घर बीजेपी में उपेक्षा के शिकार हो कर राजनीति के अंधकार में खो से गए लगते है /पिछले दिनों दिल्ली में मुलाकात हुई /दो बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर से सांसद रहे तो दो बार पूर्वी यूपी के जौनपुर और मछली शहर से सांसद रहे इस लिए उत्तर प्रदेश की समसयाओं से भालीभाती परचित है/बात होने लगी आजमगढ़ में ताजा और तेजी से पैदा होने वाली आतंकियों के पैदावार की /स्वामी जी ने कहा की आजमगढ़ में इतनी बढ़ी संख्या में आतंकियों की उपस्थति राज्य सरकार और केन्द्र सरकार की कानून और व्यवस्था के लापरवाही का परिणाम होने के साथ ही स्थानीय मुसलीमो में इस्लाम को ले कर पैदा हुए गलअत फमिया भी है /आजमगढ़ के मुसलमान आतंकियों को पैसे और अन्य तरह की मदद दे कर इस्लाम को मजबूत करने की गलतफहमी पले बैठे है /जबकि इससे इस्लाम के प्रति लोगो में नफरत ही फैल रही है /आजमगढ़ में इस समय आतंकियों की जड़े मजबूत हो गई है /मैंने योगी आदित्य नाथ पर हमले से पहले और बाद में भी आजमगढ़ में संयुक्त जाच अभियान चलने की मांग की थी यदि सरकार ने उस समय हमारी बंटू पर ध्यान दिया होता तो दिल्ली जैसी घटना को रोका जा सकता था /बहरहाल अब भी समय है की आजमगढ़ को भारत में पाकिस्तान बनने से रोका जा सकता है /अब ये सरकार को निर्णय करना है की वह इसे कैसे रोकती है /स्वामी जी आप इस बार लोकसभा कहा से लड़ेगे के सवाल पर स्वामी जी कहते है की नेत्रित्व जहा से लड़येगा वाही से लाढूगा /पर स्वामी जी की बातो से यह अनदज लगाया जा सकते है की वह आज भी जौनपुर के लिए अपनी महत्ता को समझते है /हालाँकि स्वामी जी बीजेपी द्वारा अपनी उपेक्षा पर दुखी तो है लेकिन अपने राष्ट्रवादी विचारो के क्रियान्वयन के लिए अब भी बीजेपी को ही मुफीद मानते है /स्वामी जी से बातचीत का विस्तृत ब्यौरा अगले पोस्ट में दिया जाएगा --आपका धीरेन्द्र प्रताप सिंह दुर्ग्वंशी&lt;br /&gt;Posted by dhirendra pratap singh durgvanshi &lt;a class="comment-link" onclick="" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2640020083551135672&amp;amp;postID=7568672016177341265"&gt;1 comments&lt;/a&gt; &lt;a title="Email Post" href="http://www.blogger.com/email-post.g?blogID=2640020083551135672&amp;amp;postID=7568672016177341265"&gt;&lt;/a&gt;&lt;a title="Edit Post" 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href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/5999703979415668206'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2008/10/blog-post_08.html' title='स्वामी चिन्मयानंद-राष्ट्रवाद का चितेरा संत राजनेता--धीरेन्द्र प्रताप सिंह'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-7435620530762928903</id><published>2008-10-07T23:37:00.000-07:00</published><updated>2008-10-07T23:38:41.761-07:00</updated><title type='text'>आतंकवाद-आजमगढ और आदित्यनाथ: धीरेन्द्र प्रताप सिंह</title><content type='html'>&lt;a name="5819148795132365855"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://hitchintak.blogspot.com/2008/09/blog-post_18.html"&gt;आतंकवाद-आजमगढ और आदित्यनाथ: धीरेन्द्र प्रताप सिंह&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_gsNbciDTXQg/SNINqE2mbHI/AAAAAAAAAgQ/JCRXIV1257U/s1600-h/2501-150978-_3col7.jpg"&gt;&lt;/a&gt;आतंकवाद एक समस्या है आजमगढ वह स्थान है जो इस समस्या से ग्रस्त है और आदित्यनाथ वह व्यक्ति हैं जो इस समस्या के खिलाफ जबर्दस्त मुहिम चलाए हुए है। आजमगढ आतंकवाद की उर्वरभूमि होने के साथ आतंकवादियों के पसंदीदा शरणस्थल के रुप में भी पहचाना जाता है। उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बाहुल्य इस जिले में यदि खाड़ी देशों की मुद्रा दिरहम और दीनार की बेशुमार आवक है तो वही इन दिरहमों-दीनार के मालिकों द्वारा जेहाद के नाम पर आतंकियों को दिल खोल मदद में देसी ही नही बल्कि विदेशी आतंकियों तक को अपनी तरफ आकर्षित किया है। आतंकवादियों ने अपने इस मनपंसद आरामगाह और ऐशगाह को अपनी शरणस्थली बनाने के साथ ही इसे पाक अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के कबायली इलाकों में चलाए जा रहे आतंकी प्रशिक्षण केन्द्रों की अनुकृति बनाने का अभियान भी बाकायदा चलाया हुआ है।भारत में वोट बैंक की लालच में तुष्टिकरण करने वाली सरकारों के सहयोग से ये आतंकवादी अपने खतरनाक मंसूबों में काफी हद तक सफल भी हो रहे हैं। लेकिन पूर्वाकाल में इन तत्वों के राष्ट्रद्रोही मंसूबो के पूरा होने के रास्ते में योगी आदित्यनाथ जैसे सन्यासी चट्टान की तरह खड़े मिलते है। राष्ट्रीय एकीकरण के पवित्र कार्य का बीड़ा उठाने वाले ऐसे सन्यासी शुरु से ही आतंकवादियों और चरमपंथियों के निशाने पर रहे है। योगी आदित्यनाथ विश्व प्रसिध्द कनफटे साधुओं के सबसे बड़े आस्था केन्द्र गोरक्षपीठ के घोषित उत्तराधिकारी हैं। राजनैतिक जगत में योगी की पहचान गोरखपुर से भाजपा सांसद के रूप में जरुर है लेकिन आम जनता के बीच उनकी पहचान हिन्दू हृदय सम्राट और एक ऐसे योध्दा के रूप में है जो देश में स्वामी विवेकानन्द के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए अवतरित हुआ है। कम उम्र में आश्चर्यचकित करने वाली आध्यात्मिक और शैक्षिक उपलब्धियां अर्जित करने वाले योगी आदित्य नाथ ने अपने गुरु और गोरक्षपीठ के वर्तमान पीठाधीश्वर महन्त अवैद्यनाथ के कहने पर भारतीय राजनीति की बदनाम गलियों में प्रवेश किया और आश्चर्यजनक रुप से अपनी लोकप्रियता के ग्राफ को बढ़ाया।उस गोरखपुर में जहां भाजपा जैसी राष्ट्रवादी पार्टी को अपनी जमीन तक नही मिल पा रही थी, योगी ने अपने पराक्रम से कमल खिला दिया और गोरखपुर सहित गोंडा, पड़रौना, बस्ती, देवरिया, महाराजगंज और फैजाबाद जैसे जिलों की कई लोकसभा और विधानसभा सीटें भाजपा की झोली में डाल दीं। योगी को अपने अच्छे कार्यो का पुरस्कार भाजपा से तो नहीं मिला लेकिन इस कवायद में योगी राजनैतिक और धार्मिक कट्टरपंथियों के निशाने पर जरूर आ गए। योगी ने पूर्वांचल में जब एक वर्ग विशेष की दहशत तले जी रहे समाज में चेतना भरनी शुरु की तो विघटन की राजनीति करने वाले राजनितिज्ञों और कट्टरपंथियों ने उनके रास्ते को राकेने में अपनी पूरी ताकत लगा दी। लेकिन भारत की पवित्र भूमि का यह स्वभाव रहा है कि यहां सत्य परेशान तो हो सकता है लेकिन पराजित नहीं और इसीलिए सत्यसाधक योगी आदित्यनाथ भी परेशान होने के बावजूद पराजित नहीं हुए और अपने कार्य में मनोयोग से लगे रहे, जिसका परिणाम है कि आज पूर्वांचल के 13 जिलों में योगी के नाम पर अपनी जान दे देने वालों की लम्बी फौज तैयार हो गयी है।अन्याय और अत्याचार के प्रतिकार का प्रतिरुप बन कर उभरे योगी आदित्यनाथ आज पूर्वी उत्तर प्रदेश में आतंकवाद और कट्टरवाद के फायरब्रांड शत्रु के रुप में पहचाने जाते हैं। योगी की बढती लोकप्रियता से एक तरफ जहां राजनीतिक जगत के उनके विरोधियों में अफरातफरी मची हुई है तो वही आतंकवादी तत्व भी उन्हें अपने रास्ते से हटाने के लिए अपनी साजिश को अंजाम देने की नयी नयी तरकीबें आजमा रहे हैं।&lt;br /&gt;अन्याय और अत्याचार के प्रतिकार का प्रतिरुप बन कर उभरे योगी आदित्यनाथ आज पूर्वी उत्तर प्रदेश में आतंकवाद और कट्टरवाद के फायरब्रांड शत्रु के रुप में पहचाने जाते हैं। योगी की बढती लोकप्रियता से एक तरफ जहां राजनीतिक जगत के उनके विरोधियों में अफरातफरी मची हुई है तो वही आतंकवादी तत्व भी उन्हें अपने रास्ते से हटाने के लिए अपनी साजिश को अंजाम देने की नयी नयी तरकीबें आजमा रहे हैं। विगत वर्षों में आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, गोरखपुर जैसे संवेदनशील जनपदों में विघटनकारी शक्तियों ने जब-जब भी अपनी कारगुजारियों को अंजाम देने की कोशिश की तो योगी ने इसे असफल कर दिया। इसका उदाहरण मऊ जिले में सन् 2005 के दशहरे के दौरान जब आतंकियों से संबंध का आरोप झेल रहे मुख्तार अंसारी ने दंगा भड़काया और उसका नेतृत्व किया तो दहशत से घर-बार छोड़ कर भाग चुके हजारों हिन्दुओं को योगी ने हिम्मत बंधाई, तब प्रशासन भी जागरुक हुआ और वहां दंगे थमे।योगी की कड़ाई के चलते उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को अपनी ही पार्टी के सांसद के भाई विधायक मुख्तार अंसारी को सलाखों के पीछे पहुंचाना पड़ा। योगी आदित्यनाथ की इस जिजीविषा के चलते ही आज उनकी लोकप्रियता अपने चरम पर है और उनकी इस लोकप्रियता से घबराने वाले उनके विरोधी उन्हें किसी भी कीमत पर अपने रास्ते से हटाना चाहते हैं।योगी अपनी इस लोकप्रियता से अन्जान अपनी सुरक्षा को भी दरकिनार कर अपने दैवकार्य में निरन्तर लगे हुए हैं। आजमगढ़ पूर्वी उत्तर प्रदेश का वह जिला हैं जहां पर आतंकी तत्वों की उपस्थिति के बारे में राज्य और केन्द्र का गृहमंत्रालय बराबर लोगों को सतर्क करता रहता है।&lt;br /&gt;पिछले दिनों गुजरात और राजस्थान के बम विस्फोटकांड के मास्टरमाइण्ड अबू बसर की यहां से गिरफ्तारी के बाद यह जिला एक बार फिर देश की सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर आया। इतने खतरनाक कांड के मास्टरमाइण्ड की गिरफ्तारी पर भी घृणित राजनीति करने वाली पार्टियां राजनीति करने लगीं और तो और गिरफ्तार आतंकी के घर जा कर उसके प्रति अपनी सहानुभूति दर्शायी और उन्हें एक और गोधरा-गुजरात कांड करने की छूट देने की कोशिश की। बाकी कमी इमाम बुखारी ने पूरी कर दी जिसने सपा नेताओं के साथ आजमगढ़ में सभा की और सरकार व संविधान विरोधी नारे लगावकर भारतीय लोकतंत्र का उपहास उड़ाने के साथ ही देशद्रोहियों को यह संदेश भी दिया कि वे अपना कार्य करते रहें।पिछले दिनों गुजरात और राजस्थान के बम विस्फोटकांड के मास्टरमाइण्ड अबू बसर की यहां से गिरफ्तारी के बाद यह जिला एक बार फिर देश की सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर आया। इतने खतरनाक कांड के मास्टरमाइण्ड की गिरफ्तारी पर भी घृणित राजनीति करने वाली पार्टियां राजनीति करने लगीं और तो और गिरफ्तार आतंकी के घर जा कर उसके प्रति अपनी सहानुभूति दर्शायी और उन्हें एक और गोधरा-गुजरात कांड करने की छूट देने की कोशिश की। बाकी कमी इमाम बुखारी ने पूरी कर दी जिसने सपा नेताओं के साथ आजमगढ़ में सभा की और सरकार व संविधान विरोधी नारे लगावकर भारतीय लोकतंत्र का उपहास उड़ाने के साथ ही देशद्रोहियों को यह संदेश भी दिया कि वे अपना कार्य करते रहें। अबू बशर की गिरफ्तारी और इमाम बुखारी की हरकत से आक्रोशित योगी आदित्यनाथ 7 सितंबर को आजमगढ़ के डी.ए.वी. कॉलेज में एक जनसभा को संबोधित करने जा रहे थे। इस बात की जानकारी उन्होंने स्थानीय प्रशासन को 15 दिन पहले ही दे दी थी। लेकिन पता नहीं बसपा के शासन में कार्य करने वाले प्रशासन ने इनको भाजपा का सांसद होने की वजह से या इनके हिन्दू हृदय सम्राट होने की बात से नाराज हो कर इनकी सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरती जिसका खामियाजा ये हुआ कि योगी का काफिला जैसे ही मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र तकिया में पहुंचा, पहले से ही तैयार खतरनाक मंसूबों कट्टरपंथी तत्वों ने इस संत पर हमला कर दिया। दैव योग से यह हमला तब हुआ जब योगी का वाहन आगे निकल गया था।लेकिन उनके काफिले में शामिल पांच वाहनों को आक्रमणकारियों ने बुरी तरह तहस नहस कर दिया और इनके कई भक्त भी घायल हो गए। इतनी बड़ी घटना के बाद भी योगी अपने निर्धारित कार्यक्रम से पीछे नही हटे और उस कॉलेज में जुटी भारी भीड़ को संबोधित किया और आतंकियों को उनके खूंखार मंसूबों को कामयाब न होने देने की अपनी प्रतिज्ञा भी दृढ़ता से दुहरायी। बुलन्द हौसलों के धनी योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा में खामी का अंदाजा हम इस बात से लगा सकते है कि केन्द्र की राजग सरकार ने जहां परमाणु करार पर अपनी सरकार को बचाने की एवज में अमर सिंह जैसे राज्यसभा सदस्य तक को जेड श्रेणी की सुरक्षा दे रखी है तो वहीं अपने आप को कानून और व्यवस्था की सबसे बड़ी हिमायती बताने वाली मायावती ने प्रदेश के सारे बड़े माफिया सरगनाओं को तो जेड और वाई श्रेणी की सुरक्षा दे रखी है लेकिन आतंकवादियों की आंख की किरकिरी बने योगी आदित्य नाथ को देश का दूसरा लक्ष्मणानन्द बनने के लिए भगवान भरोसे छोड़ दिया।लेकिन सरकार को याद रखना चाहिए कि यदि योगी आदित्यनाथ को कुछ होता है तो वह आतंकवादियों के लिए सुनहरा अवसर तो होगा ही पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए अकल्पनीय भी होगा क्योंकि योगी का बाल-बांका होते ही पूरा क्षेत्र हिंसा की आग में जलकर राख हो जाएगा। इसलिए सरकार को योगी आदित्यनाथ को तत्काल और पूरी सुरक्षा उपलब्ध करवा और उन पर आक्रमण कराने वाले अपराधियों पर कार्यवाई कर अपनी मुस्तैदी का प्रमाण देना चाहिए।(हिन्दुस्थान समाचार नवोत्थान लेख सेवा)&lt;br /&gt;प्रस्तुतकर्ता संजीव कुमार सिन्हा पर &lt;a class="timestamp-link" title="permanent link" href="http://hitchintak.blogspot.com/2008/09/blog-post_18.html" rel="bookmark"&gt;12:31 AM&lt;/a&gt; &lt;a title="Email Post" href="http://www.blogger.com/email-post.g?blogID=7024567440226660873&amp;amp;postID=5819148795132365855"&gt;&lt;/a&gt;&lt;a title="Edit Post" href="http://www.blogger.com/post-edit.g?blogID=7024567440226660873&amp;amp;postID=5819148795132365855"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;लेबल: &lt;a href="http://hitchintak.blogspot.com/search/label/%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7" rel="tag"&gt;आतंकवाद विरोध&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://hitchintak.blogspot.com/search/label/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%B5" rel="tag"&gt;हिन्‍दुत्‍व&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a name="comments"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;1 टिप्पणियाँ:&lt;br /&gt;&lt;a name="c8970138439114845951"&gt;&lt;/a&gt;&lt;a href="http://www.blogger.com/profile/15633449088602974803" rel="nofollow"&gt;sanjayjumnanigkp&lt;/a&gt; said...&lt;br /&gt;hi main gorakhpur ka hi rehne wala hoon aur kahin se nahin laga ki aap ki jankari adhuri ya galat hain kripya yogi ji ke haath majboot kare varna ye MUKHTAR , ATEEK AUR MULAYAM INHE NUKSAAN PAHUCHA SAKTE HAIN. ISSE HINDUON KE MANOBAL PAR KAFI FARKH PADEGA. DHANYAD&lt;br /&gt;&lt;a title="comment permalink" href="http://hitchintak.blogspot.com/2008/09/blog-post_18.html?showComment=1221729360000#c8970138439114845951"&gt;18 September, 2008 2:16 AM &lt;/a&gt;&lt;a title="Delete Comment" href="http://www.blogger.com/delete-comment.g?blogID=7024567440226660873&amp;amp;postID=8970138439114845951"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onclick="" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7024567440226660873&amp;amp;postID=5819148795132365855"&gt;Post a Comment&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a name="links"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; &lt;a class="comment-link" id="Blog1_backlinks-create-link" href="" target="_blank"&gt;&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-7435620530762928903?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/7435620530762928903/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=7435620530762928903' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/7435620530762928903'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/7435620530762928903'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2008/10/blog-post_1237.html' title='आतंकवाद-आजमगढ और आदित्यनाथ: धीरेन्द्र प्रताप सिंह'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-3590552117845126286</id><published>2008-10-07T03:19:00.000-07:00</published><updated>2008-10-07T04:26:17.805-07:00</updated><title type='text'>आजमगढ़-आतंक का गढ़ हकीकत या फसाना--धीरेन्द्र प्रताप सिंह</title><content type='html'>देश में आतंकवाद की कुछ घटनाओ के तर आजमगढ़ से जुड़ने के बाद पूर्वांचल के इस पिछडे  जनपद का अतीत और भविष्य उभरकर सामने आ गया है /आजमगढ़ के कुछ नवजवानों के बहक जाने और आतंकवादियों से मिलने की घटना ने जिले के गौरवशाली अतीत को कलंकित कर दिया है /आज की कालिमा से कल के प्रकाश यानि राहुल संकृत्यायन  अयोध्या प्रशाद उपाध्याय हरिओउध कैफी आज़मी चंद्रजीत यादव  राम्नाराश यादव जैशे सक्शियातो की सेवाए शर्मसार हो रही है /देश के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाने वाला यह जनपद समय २ पर अपनी विभिन्न भूमिकाओ को निभाता रहा है /उत्तर प्रदेश में जब पीएसी का विद्रोह हुआ था उसमे भी आजमगढ़ के युवाओ की भूमिका महत्वपूर्ण थी और पीएसी के बहुत सरे जवान माय हथियार फरार हो गए थे और जरायम को अपना पेशा बना लिया था /आजमगढ़ मुस्लिम और यादव बहुल जिला है /यादव बिरादरी के अधिकांस जवान सुरक्षाबलों और सेना में रहकर परिवार और देश की सेवा कर रहे है /लेकिन मुस्लिम आबादी को उनके नेताओ ने गुमराह कर रखा है /जिले में कलाकार्खाने और ऑओद्योगिक विकास प्रायः शुन्य है /मुस्लिम समुदाय के लोग प्रायः मजदूरी के जरिये अपना भरण पोषण करते है /मजदूरी स्थानीय रूप से उपलब्ध न होने के कारन उन्हें कलकत्ता मुंबई  या विदेश जाने के लिए विवास होना पड़ता है /उनकी इस मज़बूरी ने उन्हें साक्षरता के लिए भी प्ररित किया /जो अनपद युवा रोजगार के लिए बाहर गए उन्हें हर हालत में पैसे कमाने की धुन थी उनके पास यह जानने की न तो फुरसत थी और न ही जरूरत महसूस हुई की   वह किसके साथ कम कर रहे है और क्या कम कर रहे है /उनकी इस मज़बूरी ने उनसे खुछ ऐसे कम भी करा डाले जिसका खुलासा करने में वह अपने घर परिवार में भी खतरा महसूस करने लगे और वह अपराध के दल दल  में फसते चले गए /यही नही पैसो के लालच में उन्होंने अपने क्षेत्र के नए चेहरों को भी पैसो का लालच दे कर उसी दल दल में उतर दिया /आज यह बात खुलने पर यही गुमराह युवा आजमगढ़ और पूर्वांचल के माथे पर कलंक साबित हो रहे है /अब तक यह सिद्ध हो चुका है की आतंकवादियों केतार  आजमगढ़ से जुड़े हुए है  मगर हमारी सरकार और आला आफसर आज भी इस बात पर गंभीरता से विचार नही कर रहे है की यदि इन युवाओ को लोकल स्टार पर रोजगार  मिलता तो शयद ये उन लोगो की पकड़ में नही आते जो उन्हें गुमराह करते है /राष्ट्रघाती और आतंकवादी गतिविधियों में सलग्न कर देते३ है /हत्या लूट मार करवाते है आतंकवाद फैलाते है और उन्हें आतंकवादी बना देते है /यदि गंभीरत से सोचे तो दोष आजमगढ़  या पूर्वांचल का नही है बल्कि हालत का है  /यदि सरकार  जिले के पिछडेपनको  दूर करने ऑओद्योगिक टूर  विकास के जरिये    मुकीम तौओर पर रोजगार मुहैया करवाने का     प्रयास करती तो विदेशो में रोजी रोटी के छककर में जिले के १४००० हजार जवान यही रह कर देश की सेवा करते  और शायद तब उनके तार आतंकवादियों और देशद्रोहियों से न जुड़ते /आतंकवाद का  कलंक  लग जाने के बाद अब उन्हें सेना और अर्द्धसैनिक बालो  की सेवा में लिए जाने में भी हिचकचाहट होगी /ऐसे दशा में यह खड़ी देशो में नौकरी की तलाश में पहुचेगे जहाँ इन्हे कम तो मिलेगा लेकिन धर्म की घुट्टी पिला कर  देशद्रोह के लिए उकसाया जाएगा /इस संधर्भ में वोट की राजनीति भी खूब हो रही है /कुछ संगठन और राजनितिक दल इसकी आग पर रोटी सकने कोशिस कर रहे है /आतंकवाद के खोट में भी वोट तलाशने की उनकी यह कोशिश  देश के लिए घटक है / अब समाया अ गया है की वोट बैंक की गन्दी राजनीति छोड़ कर हमें डेस्क के बारे में गंभीरता से सोचना छाहिये  /&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-3590552117845126286?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/3590552117845126286/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=3590552117845126286' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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पार्टी के महासचिव है /आजकल आतंकवादी संगठन सिमी के प्रचार प्रमुख बनने की जी तोड़ कोशिश में है /इस चक्कर में वे क्या बोल रहे है यह शायद उन्हें भी नही पता चल पा रहा है /अपनी इन हरकतों से वो देश के लिए घातक माहौल बना रहे है /अमर सिंह ने दो दिनों पूर्व एक ब्यान दिया जिसमे उन्होंने पिछले दिनों डेल्ही के बतला हाउस में आतंकवादियों से हुए मुठभेड़ में शहीद हुए पुलिस जवान मोहन चंद्र शर्मा की निष्ठा पर ही सवाल उठा डाला /जबकि श्री शर्मा की सहादत के तुंरत बाद अमर ने उनके परिवार को १० लाख रूपये सहायता के रूप में दिया था /इससे यह बात साबित होती है की उनकी सहादत को भी अमर ने वोट बैंक में बदलने की नाकाम कोशिश की और उसके बाद मुस्लिम नेताओ के साथ कुछ दिन बाद एक कार्यक्रम में उन्होंने श्री शर्मा की सहादत पर सवाल उठाकर मुस्लिम समुदाय का भी राजनैतिक लाभ उठाने की चल चल चल दी /लेकिन शर्मा के परिवार और मीडिया की जागरूकता ने इस बार अमर की चालाकी को बेनकाब कर दिया है /शर्मा की पत्नी ने जहा उनके १० लाख रूपये को वापस कर दिया है वाही मीडिया ने भी बहस छेड़ दिया है की सहीदो की सहादत पर इस तरह की राजनीति कितनी उचित है /बहरहाल ये अमर सिंह उसी आजमगढ़ के निवासी है जहा की जमीं इस समय आतंकवाद के लिए सबसे उर्वर जमीन बन गई है /अमर सिंह ने कभी भी आजमगढ़ के विकाश या उठान के लिए कोई कार्य नही किया /इसके बारे में यदि जानना हो तो वहा इनके एक भाई है अरविन्द सिंह जो इनकी वास्तविक कहानी बताते है /इस समय अमर के काले कारनामो के सबसे बड़े विरोधी भी अरविन्द है /उनके अनुसार अमर सिंह मिटटी को भी सोना बना कर बेचने वाले प्रतिभावानों में आते है /बहरहाल अमर सिंह आरोपों के महारथी भी कहे जाते है /अमर सिंह की नजरो में साम्प्रदायिकता साम्राज्यवाद से ज्यादा खतरनाक है इसलिए आडवानी जार्ज बुश से जयादा खतरनाक है /इन्होने सोनिया गाँधी के इशारे पर कुछ दिनों पहले अपने आका मुलायम सिंह और अपने फोनों को टेप किए जाने का आरोप भी लगाया था लेकिन जाच के बाद कुछ मिला नही/वैसे अमर सिंह के सम्बन्ध राजनेताओ से जयादा अभिनेताओ से है /इसलिए कभी कभी इन्हे भी अभिनय के दौरे पड़ने की सुचना भी है/लेकिन उन्हें यह बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए की उनका यह अभिनय उनके लिए ही नही बल्कि सरे राष्ट्र के लिए खतरनाक होगा /बहरहाल अमर सिंह राजनेता है या अभिनेता है या उससे भी अलग कुछ यह निर्णय भारत की उस जनता को लेना है जो भारत को जमीं का एक टुकडा नही बल्कि अपनी माँ मानता है /माँ की अस्मिता की रक्षा के लिए अब जनता को इस बात पर गंभीरता से चिंतन करना होगा /तभी अमर सिंह जैसे आधुनिक राजनैतिक शिखंदियो को मुह तोड़ जवाब मिलेगा /जे भारत माता --धीरेन्द्र प्रताप सिंह दुर्ग्वंशी जौनपुर उत्तर प्रदेश भारत&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-7246706505171384205?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/7246706505171384205/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=7246706505171384205' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/7246706505171384205'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/7246706505171384205'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2008/10/blog-post.html' title='अमर सिंह राजनेता या राष्ट्रद्रोही'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-5738019862686981472</id><published>2008-09-03T04:12:00.000-07:00</published><updated>2008-09-03T04:37:39.237-07:00</updated><title type='text'>कश्मीर घाटी से भारत को क्यो निकला जा रहा है</title><content type='html'>कश्मीर घाटी धीरे धीरे भारत के लिए जख्म का नासूर बनती जा रही है- ऐसा सिर्फ़ हमारे कुछ तात्कालिक लाभ लेने वाले नेताओ के चलते हो रहा है-घाटी से साजिश के तहत पहले काश्मिरी पंडितो को भगाया गया और हम देखते रहे अब इस्थिति ख़राब हो गयी है तो हम सब वहां से हिंदू आबादी कम होने का रोना रो  रहे है&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;हमारी लापरवाही की वजह से आज घाटी अलगाव् वादी एजेंडा खेलने का मैदान बन गयी है इस लिए अब वह समय आ गया है की हम सभी इस मसले पर गंभीरता से सोचे और निर्णय ये की ऐसी समस्या का हमें आगे भी सामना करते रहने के लिए मजबूर रहना है या फ़िर इसे दूर करते रहना है इसलिए इस पर फौरी राजनैतिक दावो को छोड़ कर निर्णय लेना होगा तो कृपया जाअन ले की यह सिर्फ़ ४० हेक्टयेर जमीन का मसला नही है बल्कि दाव पर जो संपत्ति लगी है वह इससे कही अधिक है ----धीरेन्द्र प्रताप सिंह दुर्ग्वंशी &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-5738019862686981472?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/5738019862686981472/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=5738019862686981472' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/5738019862686981472'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/5738019862686981472'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2008/09/blog-post_03.html' title='कश्मीर घाटी से भारत को क्यो निकला जा रहा है'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-1412788813508399048</id><published>2008-09-01T07:38:00.000-07:00</published><updated>2008-09-01T07:38:50.112-07:00</updated><title type='text'>भड़ास: ....क्या ज़िंदगी एक मिसफिट इंट्रो है जिसे डिलीट कर दिया जाना है?</title><content type='html'>&lt;a href="http://bhadas.blogspot.com/2008/01/blog-post_2895.html"&gt;भड़ास: ....क्या ज़िंदगी एक मिसफिट इंट्रो है जिसे डिलीट कर दिया जाना है?&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;nahi jindgi koi missfit intro nahi hai- dhirendra pratap singh hindusthan samachar&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-1412788813508399048?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://bhadas.blogspot.com/2008/01/blog-post_2895.html' title='भड़ास: ....क्या ज़िंदगी एक मिसफिट इंट्रो है जिसे डिलीट कर दिया जाना है?'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/1412788813508399048/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=1412788813508399048' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/1412788813508399048'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/1412788813508399048'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2008/09/blog-post.html' title='भड़ास: ....क्या ज़िंदगी एक मिसफिट इंट्रो है जिसे डिलीट कर दिया जाना है?'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-2846545662979895574</id><published>2008-08-31T05:18:00.000-07:00</published><updated>2008-08-31T05:40:02.123-07:00</updated><title type='text'>ग़ज़ल जिसने प्रभावित किया</title><content type='html'>ग़ज़ल जिसने प्रभावित किया --&lt;br /&gt;तेरी बातें ही सुनाने आए \दोस्त भी दिल ही दुखाने आए \&lt;br /&gt;फूल खिलते है तो हम सोचते है \तेरे आने के जमाने आए \ आयसी कुच्छ चुप सी लगी है जैसे \&lt;br /&gt;हम तुझे हाल सुनाने आए \इश्क तनहा सरे मंजिले गम \कौन ये बोझ उठाने  आए \&lt;br /&gt;अजनबी दोस्त -हमें देख की हम कुछ तुझे याद दिलाने आए \&lt;br /&gt;दिल दाद्कता है सफर के हंगाम \काश की फिर कोई बुलाने आए \&lt;br /&gt;अब तो रोने से भी दिल दुखता है \शायद अब होश  ठिकाने आए \&lt;br /&gt;क्या कही फ़िर कोई बस्ती उजड़ी \लोग क्यो जश्न मनाने आए \&lt;br /&gt;सो रहो मौत के पहलू में धीरेन्द्र \नीद किस वक्त न जाने आए \साभार --[अहमद फराज]&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-2846545662979895574?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/2846545662979895574/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=2846545662979895574' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/2846545662979895574'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/2846545662979895574'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2008/08/blog-post_9816.html' title='ग़ज़ल जिसने प्रभावित किया'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-9011745946873745501</id><published>2008-08-31T04:30:00.000-07:00</published><updated>2008-08-31T05:03:33.676-07:00</updated><title type='text'>जिन्दगी का फलसफा</title><content type='html'>जिन्दगी--कभी सपना कभी हकीकत \कभी खुशी कभी गम \कभी मुहब्बत कभी नफरत \कभी हकीकत कभी फ़साना \कभी रोना कभी गाना \कभी माँ का दुलार तो कभी भाई का प्यार \कभी संघर्ष कभी श्रम \जितना समझा उतना ही लगा कम \नही मानी हार \लड़ रहा हूँ  और लड़ता रहुगा अन्तिम दम तक \क्योकि  लड़ना ही जिन्दगी है \लड़ता ही जा रहा हु \इस दौर की लडाई ही आगे का अनुभव है और आगे का अनुभव ही पीछे का इतिहास बनेगा \इतिहास उन्हें ही याद रखता है जो इतिहास के पन्नो में अपनी मेहनत से अपना स्थान आरक्षित करते है \जिन्दगी हर कदम इक नई जंग है \जंग को जिसने जिन्दगी की परीक्षा मान कर लड़ने की हिम्मत दिखायी वह जंग से निकले जाबांज की तरह जिन्दगी के वैभव का उपभोग करता है \जंग की जद्दोजहद में जमा आपका --धीरेन्द्र प्रताप सिंह दुर्गावंशी तेजीबाज़र जौनपुर उत्तर प्रदेश&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-9011745946873745501?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/9011745946873745501/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=9011745946873745501' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/9011745946873745501'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/9011745946873745501'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2008/08/blog-post_31.html' title='जिन्दगी का फलसफा'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8103657923676562451.post-6002083782476006840</id><published>2008-08-21T03:12:00.000-07:00</published><updated>2008-08-31T04:26:03.668-07:00</updated><title type='text'>धीरेन्द्र -पहचान को दूद्ता परिंदा</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मेरा छोटा सा परिचय - धीरेन्द्र प्रताप सिंह &lt;/p&gt;&lt;p&gt;पेशा - पत्रकारिता &lt;/p&gt;&lt;p&gt;निवास -पहाड़गंज -न्यू डेल्ही &lt;/p&gt;&lt;p&gt;मूल निवास -तेजीबाजर-जौनपुर उत्तर प्रदेश &lt;/p&gt;&lt;p&gt;उद्देश्य -समाज के मूक तबके को वाणी देने में अपनी भूमिका को सुनिश्चित करना &lt;/p&gt;&lt;p&gt;सफलता -समाज तय करेगा &lt;/p&gt;&lt;p&gt;आदर्श - वे लोग जो जमीं से उठ कर आसमान छू  लेते है और फ़िर भी कोई घमंड नही करते &lt;/p&gt;&lt;p&gt;अपने बारे में --हम तो यारो सच कहते है \हमसे लोग खफा रहते है \अपनी तैराकी है उलटी \धारा में उल्टे बहते है \&lt;/p&gt;&lt;p&gt;दोस्तों के बारे में --बहुत पहले  तेरे कदमो की आहत जन लेते है \तुझे ऐ दोस्त हम तो दूर से पहचान लेते है \&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8103657923676562451-6002083782476006840?l=alagvichar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://alagvichar.blogspot.com/feeds/6002083782476006840/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8103657923676562451&amp;postID=6002083782476006840' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/6002083782476006840'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8103657923676562451/posts/default/6002083782476006840'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://alagvichar.blogspot.com/2008/08/blog-post_21.html' title='धीरेन्द्र -पहचान को दूद्ता परिंदा'/><author><name>dhirendra pratap singh durgvanshi</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_TaCoE9bnFxA/SOoca7wZjaI/AAAAAAAAAAk/437Ew_D-8LE/S220/Picture+001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry></feed>
